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बिहार बाढ़: ना खाने की रोटी और ना पीने का पानी,10 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

बिहार बाढ़: बिहार में बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है। नेपाल में हो रही भारी बारिश के पानी से आधा बिहार (नार्थ बिहार) डूबा हुआ है। बिहार की कई नदियां उफान पर हैं। 16 जिलों के करीब 10 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित है। सब कुछ डूब गया है। ना खाने का ठिकाना है। ना पीने का पानी है। जो बीमार हैं वो दवा के लिए तरस गए हैं। पूर्णिया, सहरसा, सुपौल, दरभंगा में हालात बेहद खराब हैं। बाढ़ के बीच अब वायुसेना की मदद ली जा रही है। एयरफोर्स की मदद से बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों तक हेलिकॉप्टर से फूड के पैकेट्स पहुंचाए जा रहे हैं।

पिछले 24 घंटे में दरभंगा से लेकर सहरसा जैसे नए इलाकों में बाढ़ का पानी फैल गया है। अब तक 16 जिलों में 10 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। सबसे ज्यादा पश्चिमी चम्पारण, अररिया, किशनगंज, गोपालगंज, शिवहर, सीतामढ़ी, सुपौल, मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, मधुबनी, दरभंगा, सारण, सहरसा और कटिहार जिले बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इन जिलों के 76 प्रखंडों के 368 पंचायतों में बाढ़ का पानी फैल चुका है। यहां आम लोगों का जनजीवन पटरी से उतर गया है। यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

दरअसल, बिहार में कुल 38 जिले हैं और पिछले 2 दिनों से आधे जिलों में 10 लाख लोग बाढ़ के पानी से जंग लड़ रहे हैं। सब कुछ डूब गया है। ना खाने की रोटी है. ना पीने का पानी। जो बीमार हैं वो दवा के लिए तरस गए हैं। बच्चे-बुजुर्ग-महिलाएं. क्या इंसान, क्या मवेशी… बाढ़ ने भयानक तबाही मचाई है।

नेपाल ने कोसी-गंडक में इतना अधिक पानी छोड़ा की मच गई तबाही

सरकार का कहना है कि नेपाल में 70 घंटे की बारिश के बाद कोसी-गंडक में इतना पानी छोड़ दिया गया कि तबाही मच गई। उत्तरी बिहार में 24 घंटे के अंदर 4 जिलों में 7 तटबंध टूट चुके हैं। 55 प्रखंडों के 270 गांव पूरी तरह डूबे हुए हैं। आम जनता का सवाल यही है कि आखिर बिहार की बाढ़ वाली समस्या का क्या कोई समाधान नहीं है? आखिर आज तक किसी पार्टी और सरकार ने बिहार को बाढ़ से बचाने में दिलचस्पी क्यों नहीं दिखाई? आजादी के 70-80 साल बाद भी बिहार में बाढ़ की त्रासदी रोकने के लिए कोई ठोस उपाय क्यों नहीं किए गए।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का एरियल सर्वे किया

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी मंगलवार को कोसी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का एरियल सर्वे किया है। वहीं, बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए केंद्र सरकार की ओर से पहली किश्त 655.60 करोड़ रुपए जारी की गई है। राष्ट्रीय आपदा राहत कोष से अग्रिम सहायता राशि जारी की गई है।

वायु सेना की मदद से सूखे राशन के पैकेट गिराए गए

सीतामढ़ी और दरभंगा जिले में पानी से घिरे गांवों में वायु सेना की मदद से सूखे राशन के पैकेट गिराए गए। इन गांवों में आवागमन पूरी तरह बाधित है। मंगलवार की देर शाम मुजफ्फरपुर के औराई में लखनदेई का भी बांध टूट गया। 15 गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से टूट गया।

केंद्र ने मदद के लिए 655 करोड़ जारी किए

मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया और आपदा से निपटने के निर्देश दिए हैं। सीएम नीतीश का कहना था कि खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का है। राहत-बचाव के कार्य और अन्य सुविधाओं में कोई कमी नहीं छोड़ी जाए। वहीं, केंद्र सरकार ने मंगलवार को बिहार के लिए आपदा राहत कोष से 655 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं। केंद्रीय टीमें नुकसान का आकलन करेंगी। केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट में बिहार को 58900 करोड़ रुपये के स्पेशल पैकेज की घोषणा की है, उसमें 11.50 हजार करोड़ रुपये सिर्फ बाढ़ की आपदा से निपटने के लिए ही मिला है।

आधा बिहार डूबा हुआ है…

पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गोपालगंज, किशनगंज, अररिया, सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, मधुबनी, भागलपुर समेत गंगा के किनारे बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुंगेर सब बाढ़ में डूबे हुए हैं। यहां 16 लाख लोगों की जिंदगी पानी-पानी हुई है। कोसी, गंडक, बागमती, कमला बलान और गंगा नदी उफान पर है। हालात 1968 की भीषण तबाही की याद दिलाने लगे हैं. कोसी-गंडक के सारे रिकॉर्ड टूट गए।

बिहार में 11 अक्टूबर तक बारिश होने की संभावना

राज्य से मानसून की विदाई अभी नहीं हुई है। 11 अक्टूबर तक बारिश होने की संभावना है। दशहरा के आसपास हल्की बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने 3 और 4 अक्टूबर को पूर्वी बिहार में बारिश होने की संभावना जताई है। इस दौरान सुपौल, अररिया, किशनगंज, मुंगेर, जमुई, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, खगड़िया, बांका में बारिश की संभावना है।

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