मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आदिवासी नृत्य महोत्सव का शुभारंभ करने राजधानी रायपुर स्थित साइंस कॉलेज मैदान पहुंचे। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ.चरणदास महंत, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे, परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर, संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, आबकारी मंत्री कवासी लखमा, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंड़िया सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित हैं। आदिवासी नगाड़ा बजाकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव 2021 की कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। 

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सीएम बघेल ने कहा कि “मैं सभी राज्यों के नर्तक दल और विदेशी मेहमानों का हार्दिक स्वागत करता हूं। सभी प्रदेश वासियों को राज्य स्थापना दिवस और तीसरे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव की बहुत बहुत बधाई।”

आगे उन्होंने कहा कि “दुनियाभर के आदिवासी समाज के नृत्य की कलाएं बहुत हद तक समान है। आदिवासियों की छोटी सी इच्छा यही है कि प्रकृति पर पूरी मनुष्यता का समान अधिकार हो और मिलजुलकर संरक्षण करें। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का उद्देश्य आदिम संस्कृति को बचाये रखना है।

छत्तीसगढ़ की संस्कृति को बचाये रखने के लिए हमने बहुत कार्य किया है। उन्होंने कहा कि आज का क्षण हमारे लिए आत्म गौरव का है। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य समारोह का ये तीसरा आयोजन है, लेकिन इसमें देश विदेश के 1500 कलाकार प्रस्तुति देंगे। इससे आदिवासी संस्कृति के प्रसार और विनिमय का दायरा बढ़ेगा।

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गौरवशाली है नृत्य का इतिहास

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि मनुष्य का इतिहास जितना पुराना है उतना ही पुराना नृत्य का इतिहास है, एक गौरवशाली इतिहास हमें हर पारम्परिक नृत्य का देखने को मिलता है। दुनियाभर के आदिवासियों की नृत्य शैली, वाद्ययंत्र में समानता है। आदिम नृत्य की यह परंपरा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक आई है, इस तरह से हम आज यहां पहुंचे हैं। समय के बदलाव के साथ जीवन के तौर तरीके में बदलाव आया है।

इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य आदिवासियों की परंपरा को बचाए रखने और पूरी दुनिया की आदिम संस्कृति आगे बढ़ाने और उनका संवर्धन करने से है। प्रकृति पर पूरी मनुष्यता का एक जैसा अधिकार हो, सभी प्रकृति का संरक्षण करें। विकास की गलत अवधारणा के कारण आज प्रकृति ही खतरे में पड़ गयी है। छत्तीसगढ़ आदिवासियों और किसानों का प्रदेश है। राज्य के आंदोलन में जिन मूल्यों को लेकर आंदोलन हुआ, हमारी सरकार उस सोच को लेकर आगे बढ़ रही है।

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