नई दिल्ली :- सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया। हालांकि, नीट पेपर लीक और छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर विपक्ष के जोरदार विरोध के कारण संसद का माहौल गरमा गया और लगातार हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
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सरकार की ओर से इस पर चर्चा के लिए एनडीए के नौ सांसदों को शामिल किया गया है। विधेयक पेश होने के साथ ही संसद का माहौल गर्मा गया। नीट पेपर लीक प्रकरण और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। पहले सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों में लोकसभा और राज्यसभा को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी गतिरोध जारी रहा और लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
इससे पहले कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन करते हुए सरकार से पेपर लीक मामले और छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर जवाब मांगा। विपक्ष का कहना है कि जब तक इस पूरे प्रकरण में जवाबदेही तय नहीं की जाती, तब तक संसद के भीतर और बाहर उनका विरोध जारी रहेगा।
इसी बीच, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे। संसद परिसर में एनडीए सांसदों ने उनका शॉल और पारंपरिक मिथिला पाग पहनाकर स्वागत किया तथा समर्थन में नारे लगाए। उल्लेखनीय है कि प्रधान ने 25 जुलाई को नीट पेपर लीक विवाद के बीच अपने पद से इस्तीफा दिया था।
सरकार का कहना है कि नया संशोधन विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक की घटनाओं पर कड़ी रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग पर अड़ा हुआ है, जिसके चलते संसद में राजनीतिक टकराव लगातार तेज होता जा रहा है।
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