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भोजन और यादें मनोभ्रंश रोगियों की देखभाल में नया आयाम

वेब -डेस्क :- भोजन  परिचित स्वाद, सुगंध और पारंपरिक व्यंजन मनोभ्रंश रोगियों को भावनात्मक सुख और मानसिक शांति प्रदान कर सकते हैं। ये अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को मजबूत करने और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में भी सहायक होते हैं।

खास बातें:

मनोभ्रंश से जूझ रहे व्यक्तियों को अक्सर स्मृति हानि और भ्रम का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पारंपरिक व्यंजनों की महक, घर की यादों को ताजा करती है। हल्दी वाली दाल या घी से भरे पराठे की खुशबू उन्हें बचपन की रसोई या पारिवारिक उत्सवों की याद दिला सकती है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे सुरक्षित महसूस करते हैं।

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सांस्कृतिक रूप से समावेशी देखभाल का महत्व

दक्षिण एशियाई संस्कृतियों में, भोजन सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है। आटा गूंथने, मसाले पीसने या चावल पकाने जैसी साधारण क्रियाएं मनोभ्रंश रोगियों को मानसिक रूप से सक्रिय बनाए रखती हैं। इससे उनके मोटर स्किल्स भी बेहतर होते हैं और उनमें जुड़ाव की भावना बढ़ती है।

अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को मजबूत करता है खाना पकाना

पारंपरिक व्यंजनों को तैयार करने की प्रक्रिया में दादा-दादी अपने पोते-पोतियों को खाना बनाना सिखा सकते हैं। इससे पीढ़ियों के बीच संवाद और भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है। यह प्रक्रिया सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करती है और बच्चों में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और सहानुभूति को बढ़ावा देती है।

डिमेंशिया देखभाल में भोजन की भूमिका

मनोभ्रंश देखभाल में भोजन एक प्रभावी रणनीति के रूप में उभर रहा है। फिंगर फूड जैसे पकौड़े या भरवां पराठे रोगियों के लिए आसान होते हैं, जबकि कम सामग्री वाले व्यंजन उन्हें खाना पकाने में आत्मनिर्भर बनाते हैं। इसके साथ ही पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वसा और मसालों को संतुलित किया जा सकता है।

सामुदायिक समर्थन और जागरूकता की आवश्यकता

देखभाल करने वालों को अक्सर संसाधनों और समय की कमी होती है, जिससे भोजन-आधारित गतिविधियों को अपनाना कठिन हो जाता है। सामुदायिक केंद्र और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा आयोजित कार्यशालाएं इस बाधा को दूर करने में मदद कर सकती हैं।

भोजन: पोषण से अधिक, संबंध का माध्यम

मनोभ्रंश देखभाल में भोजन सिर्फ पोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संबंध, पहचान और उपचार का जरिया भी है। सांस्कृतिक रूप से अनुकूलित दृष्टिकोण अपनाकर, देखभाल करने वाले साथी और परिवार, मनोभ्रंश रोगियों के जीवन में सुखद बदलाव ला सकते हैं।

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