इजरायल का ‘ऑपरेशन मेनी वेज’, 120 कमांडो ने सीरिया में मचाई तबाही, ईरानी मिसाइल फैक्ट्री को किया बर्बाद

इजरायल का ‘ऑपरेशन मेनी वेज’, 120 कमांडो ने सीरिया में मचाई तबाही, ईरानी मिसाइल फैक्ट्री को किया बर्बाद

IDF Secret Mission in Syria : इजरायल की सेना ने सीरिया में अपने एक सीक्रेट मिशन को लेकर बड़ा खुलासा किया है. IDF ने बताया, ‘राष्ट्रपति बशर अल-असद की सत्ता के रहने के दौरान ही इजरायल के 120 कमांडो ने सीरिया में जमकर तबाही मचाई थी.वहीं, ईरान की मदद से सीरिया में जमीन के नीचे चल रही मिसाइल फैक्ट्री को भी पूरी तरह से बर्बाद कर दिया.”

IDF ने बताया कि इजरायल ने इस सीक्रेट मिशन को 8 सितंबर, 2024 को अंजाम दिया था, लेकिन अब इसे सार्वजनिक किया गया है. इजरायल ने इस सीक्रेट मिशन को ‘ऑपरेशन मेनी वेज’ नाम दिया था. जिसे इजरायली सेना के खुंखार शालडाग यूनिट ने मात्र 3 घंटे में अंजाम दिया था.

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जमीन के नीचे चल रही थी मिसाइल फैक्ट्री

इजरायली सेना ने बताया कि ईरान की यह मिसाइल फैक्ट्री सीरिया के मसयफ इलाके में जमीन के 70 से 130 मीटर नीचे कई परतों में बनी हुई थी. जहां घातक मिसाइलों का निर्माण किया जाता था और फिर इसे लेबनान में हिजबुल्लाह और बशर अल-असद की सेना को भेज दिया जाता था.

सीरिया की एयर डिफेंस इजरायल को रोकने में नाकाम

उल्लेखनीय है कि इजरायली सेना के कमांडोज ने इस सीक्रेट मिशन को सीरिया के 200 किलोमीटर अंदर घुसकर अंजाम दिया और सीरिया के एय़र डिफेंस सिस्टम उन्हें रोकने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुए. इस पूरे मिशन में इजरायली सेना को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ.

2017 में शुरू हुआ था मिसाइल फैक्ट्री का निर्माण

इजरायल ने बताया, “IDF के एक हवाई हमले में ईरान का एक रॉकेट बनाने वाला कारखाना तबाह हो गया था. इसके बाद ईरान ने पहाड़ के नीचे इस मिसाइल फैक्ट्री का निर्माण साल 2017 में शुरू किया था. जो साल 2021 में शुरू हुआ था. इस फैक्ट्री का निर्माण जमीन से 70 से 130 मीटर नीचे की गई थी. इसमें 16 कमरे बने थे, जिनमें मिसाइल बनाई जाती थी. हमारा अनुमान है कि वहां 100 से लेकर 300 मिसाइलों का निर्माण हर साल होता था और इनकी मारक क्षमता 300 किमी तक थी.”

इजरायल के एलीट कमांडोज ने मिशन को दिया था अंजाम

सीरिया में ऑपरेशन मेनी वेज में कुल 120 कमांडोज शामिल थे, जिनमें 100 घातक दल के कमांडो थे और 20 मेडिकल कर्मी की यूनिट से थे. कमांडोज CH-53 यासूर हैवी ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर से समुद्र के रास्ते से सीरिया में दाखिल हुए थे. इनके साथ अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर, 21 फाइटर जेट, 5 ड्रोन और 14 निगरानी विमान हवा में मौजूद थे. जिन्होंने 3 घंटे में पूरा मिशन को अंजाम दिया था.

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