वेब-डेस्क :- भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचपन काफी संघर्ष भरा रहा है। आजाद भारत में जन्म लेने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री का पूरा परिवार एक छोटे से एक मंजिला घर में रहता था। गुजरात में मेहसाणा (तब बांबे राज्य का हिस्सा) जनपद के वडनगर में 17 सितंबर 1950 को पैदा हुए प्रधानमंत्री का पूरा नाम नरेंद्र दामोदरदास मोदी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद मोदी और मां का नाम हीराबेन मोदी है। वह अपने माता-पिता की छह में से तीसरी संतान हैं।
शुरू से ही मेहनती थे PM मोदी
बताया जाता है कि बचपन में प्रधानमंत्री मोदी चाय की दुकान पर काम करने के साथ पढ़ाई करते थे। उनके स्कूल के एक दोस्त के हवाले से मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, मोदी शुरू से ही मेहनती थे। तो चलिए उनके जन्मदिन पर जान लेते हैं उनके जीवन से जुड़े प्रेरित करने वाले किस्से-कहानियां।
पहली बार सीएम बनने पर मां ने दी थी यह सीख
प्रधानमंत्री मोदी अपनी मां हीराबेन के काफी करीब थे। वह उनसे मिलने के लिए अक्सर गुजरात जाते थे। दिसंबर 2022 में हीराबेन का 100 साल की उम्र में निधन के बाद प्रधानमंत्री काफी भावुक हो उठे थे। प्रधानमंत्री और उनकी मां का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया था जिसमे अलग-अलग आॉडियो-वीडियो क्लिप थी। उनमे से एक हीराबेन और मोदी की उस समय की क्लिप भी थी, जब वह पहली बार गुजरात के सीएम बनने के बाद मां का आशीर्वाद ले रहे थे। तब मां ने उनको खास नसीहत भी दी थी। आपको बता दे इस बात का जिक्र प्रधानमंत्री ने मीडिया से बातचीत के दौरान भी किया है। पहली बार सीएम बनकर वह मां के पास गए तो उन्होंने कहा, तुम क्या काम करते हो, मैं नहीं जानती, लेकिन जिंदगी में कभी रिश्वत मत लेना।
ट्रेन की फर्श पर सोए मोदी
कभी रेलवे में सेंट्रल फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम की जनरल मैनेजर रहीं लीना सरमा ने प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ा एक आर्टिकल द हिंदू में लिखा था। इसमें उन्होंने बताया कि नौकरी में प्रोबेशन के दौरान एक बार वह अपनी सहेली के साथ अहमदाबाद जा रही थी पर उनके पास टिकट नहीं था।
टीटीई से पूछकर वे एक कोच में सवार हुईं तो उसमें दो नेता थे। बोगी में पहुंचने पर दोनों नेताओं ने लीना और उनकी बैचमेट के लिए सीट पर जगह बनाई। साथ ही उन्होंने रात के खाने का पेमेंट दिया और सोने की बारी आई तो दोनों ने ही अपनी सीटें छोड़ दी और चादर बिछाकर फर्श पर सो गए। ये दोनों नेता थे नरेंद्र मोदी और शंकर सिंह वाघेला।
शादी के बाद बन गए संन्यासी
मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि नरेंद्र मोदी शादी नहीं करना चाहते थे। हालांकि, घर वालों ने यशोदाबेन मोदी से उनकी शादी करा दी पर फिर भी वह संन्यासी बनने निकल गए। उन्होंने इस दौरान देश के उत्तर और उत्तर-पूर्व क्षेत्रों की यात्रा की। दो साल बाद वह लौटे तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हो गए।
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साल 1972 में वह गुजरात के अहमदाबाद में संघ के प्रचारक बनाए गए। संघ में शामिल होने के बाद से ही उनके दिन की शुरुआत सुबह पांच बजे होने लगी। साल 1987 में उनको गुजरात में भाजपा का महासचिव बनाया गया और इसके बाद भाजपा ने अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन का चुनाव पहली बार जीता। साल 1990 में गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा के वोटों में वृद्धि हुई और वह दूसरे नंबर पर पहुंच गई। साल 1995 में भाजपा को गुजरात की 121 सीटों पर जीत मिली तो इसी साल नरेंद्र मोदी को भाजपा का राष्ट्रीय सचिव भी बनाया गया।
बिना चुनाव लड़े ही बनाए गए थे गुजरात के मुख्यमंत्री
साल 2001 में भाजपा ने नरेंद्र मोदी को पहली बार गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया। हालांकि, तब वह गुजरात विधानसभा के सदस्य भी नहीं थे। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद यह जरूरी था कि वह विधानसभा का चुनाव लड़ें बस इसलिए फरवरी 2002 में वह राजकोट विधानसभा क्षेत्र से चुनाव के मैदान में उतरे और 14 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की।
साल 2014 तक वह लगातार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे है , फिर 2014 में पार्टी ने उनको प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया और 26 मई 2014 को उन्होंने यह पद भी संभाल लिया। इसके बाद 2019 में भी प्रचंड बहुमत से प्रधानमंत्री मिले और 2024 के चुनाव के बाद तीसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री के रूप में काम कर रहे हैं।
अमेरिका ने नहीं दिया था वीजा
यह साल 2005 की बात है। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका ने अपने यहां का वीजा देने से इनकार कर दिया था। मोदी उस साल एशियाई-अमेरिकी होटल मालिकों के वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका जा रहे थे, तभी उन्होंने वीजा के लिए आवेदन किया था। हालांकि, साल 2002 के दंगों में कथित भूमिका के कारण अमेरिका ने उन्हें वीजा नहीं दिया और भारत का प्रधानमंत्री बनने से पहले तक पाबंदी लगाए रखी। यह और बात है कि प्रधानमंत्री मोदी 2014 से अब तक तमाम बार अमेरिका समेत तमाम देशों की यात्राएं कर चुके हैं।
वह कई ऐसे देशों की यात्रा पर भी गए, जहां पहले कभी कोई भारतीय प्रधानमंत्री नहीं गया या किसी प्रधानमंत्री को वहां गए लंबा अरसा बीत चुका था।
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