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‘महाविद्या’ का गुप्त नवरात्री में महत्व

'गुप्त नवरात्रों' में महाविद्या की उपासना से मिलते हैं चमत्कारिक परिणाम

by Admin

न्यूज़ डेस्क :- हिंदू धर्म में नवरात्रि का त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है, साल में दो नवरात्रि ऐसी आती है जिसके बारे में हर कोई जानता है | पर 1 साल में कुल 4 नवरात्रि के त्यौहार होते हैं, जिनमें से दो गुप्त नवरात्र कहलाते हैं | इन दिनों भी 2 फरवरी से गुप्त नवरात्रि का त्यौहार चल रहा है, जिसकी आज अष्टमी तिथि है |

आइए जानते हैं इसके महत्व के बारे में…….

एक वर्ष में दो गुप्त नवरात्री होती है, गुप्त विद्या, तंत्र विद्या, मंत्र विद्या और गुप्त रहस्य को जानने की इच्छा रखने वालों को यह गुप्त नवरात्री अभीष्ट फल प्रदान करती है। इस नवरात्री में तंत्र दक्षिणपंथी साधकों को विशेष सफलता मिलती है। तंत्र विद्या के साधकों की तांत्रिक क्रियाएं इस पर्व में विशेष सफल होती हैं। अनुष्ठान, देव यज्ञ, ब्रह्म यज्ञ और दीर्घकालीन साधनाएं महानवमी के दिन पूर्ण होकर सिद्ध होती है। तंत्र विद्या के जानकार बताते हैं कि यह गुप्त नवरात्री उनके लिए एक वरदान है।

विद्यार्थियों के लिए भी गुप्त नवरात्रि एक वरदान की तरह है, क्यूकी इस नवरात्री के दौरान ही बसंत पंचमी का पर्व भी पड़ता है। संगीत से जुड़े लोगों, शब्द योग, ध्यान के साधकों को भी इस नवरात्रि में विशेष सिद्धियां प्राप्त होती है। इस नवरात्री में सिद्ध कुंजिका स्रोत, अर्गला स्त्रोत्र, श्री सुक्तम, लक्ष्मी सुक्तम, दुर्गा सप्तशती, गायत्री मंत्र का पाठ करना करना पुण्यकारी होता है।

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तंत्र-मंत्र के साधक इस गुप्त नवरात्रि का विशेष रुप से इंतजार करते हैं। वे संपूर्ण साधना के साथ गुप्त नवरात्रि के एक-एक पल का आनंद उठाते हैं।चूंकि गुप्त नवरात्रि में तंत्र साधना का विशेष महत्व है इसलिए इसमें मुख्यत: दस महाविद्याओं की उपासना की जाती है। शाक्य भक्तों के अनुसार (शाक्य संप्रदाय हिंदू धर्म के तीन प्रमुख सम्प्रदायों में से एक है ) ‘दस रूपों में समाहित एक सत्य की व्याख्या है – महाविद्या’ जिससे जगत जननी जगदम्बा के दस लौकिक व्यक्तित्वों की व्याख्या होती है। महाविद्याएं तान्त्रिक प्रकृति की मानी जाती हैं |

ये हैं वो दस महाविद्याएं……👇

  1. काली
  2. तारा
  3. छिन्नमस्ता
  4. षोडशी
  5. भुवनेश्वरी
  6. त्रिपुर भैरवी
  7. धूमावती
  8. बगलामुखी
  9. मातंगी
  10. कमला

इस वर्ष 2 फरवरी से शुरू हुई गुप्त नवरात्री का कल महानवमी के साथ समापन होगा। नवरात्री की ये नवमी तिथि महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि जो नौ दिनों तक पूजा नहीं कर पाते वे नवमी तिथि को पूजा कर लें तो उन्हें नौ दिनों का फल मिलता है। गुप्त नवरात्री की नवमी तिथि को मांगलिक कार्य जैसे मंडपाच्छादन, हरिद्रालेपन, सगाई, लग्न, फलदान, तिलक करना भी बहुत ही श्रेष्ठतम माना गया है। ऐसी मान्यता है कि विधिपूर्वक विभिन्न कर्मकांडों के साथ सनातन परंपरा में किए गए विवाह आज के दिन सिद्ध होतो हैं।

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