मनोरंजन डेस्क :- पहली उपलब्धि हमेशा खास होती है और इस साल की सबसे सफल फिल्म फ्रेंचाइज़ी धुरंधर के निर्माताओं के लिए अपनी पहली ही फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कारों में बड़ी जीत हासिल करना किसी यादगार पल से कम नहीं है। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में Article 370 को सबसे ज्यादा सम्मान पाने वाली फिल्मों में शामिल किए जाने के कुछ ही दिनों बाद, बी62 स्टूडियोज़ के सह-संस्थापक और निर्माता लोकेश धर ने एक भावुक नोट साझा किया है। इस नोट में उन्होंने फिल्म के सफर, स्टूडियो की सोच और उन कहानियों का जिक्र किया है जो उनके सिनेमा की पहचान बनती जा रही हैं।
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लोकेश धर ने Article 370 को बी62 स्टूडियोज़ की लगभग दो साल पहले रिलीज़ हुई पहली फिल्म बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय पुरस्कारों में मिली यह पहचान पूरी टीम के लिए गर्व और आभार का क्षण है।
अपने विचार साझा करते हुए लोकेश धर ने लिखा, “राष्ट्रीय पुरस्कारों की घोषणा हुए कुछ समय हो गया है। Article 370, बी62 स्टूडियोज़ की पहली फिल्म थी, जिसे हमने लगभग दो साल पहले रिलीज़ किया था। हमारी कोशिश हमेशा ऐसी कहानियां पर्दे पर लाने की रही है जो हमें रातों में जगाए रखें और फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शकों के मन में बनी रहें। हालात हमारे पक्ष में नहीं थे, लेकिन अंडरडॉग होना भी अपने आप में खास होता है।”
फिल्म की सफलता पर उन्होंने आगे लिखा, “इस फिल्म का तीन राष्ट्रीय पुरस्कार — सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक — जीतना हमारे लिए बहुत बड़ा सम्मान है। मैं 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की जूरी का दिल से आभारी हूं। दर्शकों ने जिस तरह Article 370 को प्यार दिया, उसी तरह उन्होंने Dhoom Dhaam, Baramulla और Dhurandhar को भी अपनाया। इस प्यार को शब्दों में बयां करना मुश्किल है।”
लोकेश धर ने उन निजी यादों का भी जिक्र किया जिन्होंने बी62 स्टूडियोज़ की कहानियों को आकार दिया। उन्होंने बताया कि बचपन में परिवार के बुजुर्गों से कश्मीर की कहानियां सुनना उनके लिए बेहद खास अनुभव था और वही किस्से आज भी उनके स्टूडियो की रचनात्मक सोच को प्रेरित करते हैं।
उन्होंने लिखा, “मुझे लगता है कि इस सफलता में हमारे बड़ों के आशीर्वाद का भी बड़ा योगदान है। जब शाम को बिजली चली जाती थी, तो सन्नाटे को सबसे पहले बैटरी से चलने वाले रेडियो पर आने वाली रेडियो कश्मीर की खबरें तोड़ती थीं। उसके बाद शुरू होता था कहानियों का सिलसिला। घर के बड़े ऊनी कालीन पर बैठकर ऐसे किस्से सुनाते थे जिनमें नदियां और भी चौड़ी होती थीं, बर्फ और भी गहरी होती थी और बर्फ की लटकती झालरें पहले से कहीं ज्यादा लंबी। वे कहानियां इतनी बड़ी होती थीं कि हमें अपनी दुनिया में खींच लेती थीं, लेकिन कभी इतनी नहीं कि हमारा ध्यान भटक जाए।”
अपने संदेश के अंत में उन्होंने इस उपलब्धि को उन सभी लोगों को समर्पित किया जिन्होंने इस सफर को संभव बनाया।
उन्होंने लिखा, “किसी न किसी रूप में हम अपनी हर फिल्म के जरिए उन्हीं कहानियों को सम्मान देने की कोशिश करते हैं। हम भले ही एक दिन इस दुनिया में न रहें, लेकिन उन लोगों का साहस और जज़्बा हमारी फिल्मों के जरिए हमेशा जीवित रहेगा। यह सब उन लोगों के बिना संभव नहीं था जिन्होंने हमारे साथ मिलकर इस सफर को बनाया — हमारी शानदार कास्ट और क्रू, हमारे निर्देशक, लेखक, जियो स्टूडियोज़ और हमारे परिवार व दोस्त, जो हर कदम पर हमारे साथ खड़े रहे। यह उपलब्धि जितनी हमारी है, उतनी ही उनकी भी है।”
Article 370 ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में तीन बड़े सम्मान अपने नाम किए — सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म, यामी गौतम धर के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और शाश्वत सचदेव के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक। यह उपलब्धि बी62 स्टूडियोज़ की पहली फिल्म के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित हुई और एक बार फिर इस बात को मजबूत करती है कि स्टूडियो भारतीय संस्कृति और संवेदनाओं से जुड़ी दमदार कहानियां दर्शकों तक पहुंचाने के अपने संकल्प पर लगातार आगे बढ़ रहा है।
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