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17 बच्चों को बंधक बनाने वाले रोहित आर्या की मुठभेड़ में मौत…

मुंबई :-  मुंबई के पवई इलाके में गुरुवार को एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जब रोहित आर्या (49) नामक व्यक्ति ने एक डॉक्यूमेंट्री के ऑडिशन के बहाने आरए स्टूडियो में 17 बच्चों समेत कुल 20 लोगों को बंधक बना लिया। आरोपी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर कहा कि उसका इरादा आत्महत्या करने का था, लेकिन उसने ‘कुछ बड़ा करने’ की ठानी। पुलिस की त्वरित कार्रवाई में सभी बंधकों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन इस दौरान हुई मुठभेड़ में रोहित आर्या की मौत हो गई।

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पुलिस के मुताबिक, दोपहर करीब 1:30 बजे सूचना मिली कि पवई के आरए स्टूडियो में कुछ लोगों को बंधक बनाया गया है। मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी को शांतिपूर्ण तरीके से आत्मसमर्पण करने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन जब वह नहीं माना तो क्विक रिएक्शन टीम (QRT) के आठ कमांडो को बाथरूम के रास्ते ऑडिशन रूम में भेजा गया।

सिर्फ 35 मिनट में ऑपरेशन पूरा कर सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस दौरान आरोपी ने एयरगन से हमला करने की कोशिश की, जिसके जवाब में पुलिस ने गोली चलाई। गोली उसकी छाती पर लगी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

आरोपी का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

जानकारी के अनुसार, पुणे निवासी रोहित आर्या पिछले कई महीनों से आर्थिक और मानसिक परेशानियों से जूझ रहा था। वह दावा कर रहा था कि उसने महाराष्ट्र सरकार की ‘मुख्यमंत्री माझी शाला सुंदर शाला योजना’ के तहत ‘स्वच्छता मॉनिटर’ नामक एक प्रोजेक्ट पर काम किया था, जिसके बदले राज्य सरकार से उसे लगभग ₹2 करोड़ का भुगतान नहीं मिला।

आर्या ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपना घर और गहने तक बेच दिए थे। सरकारी भुगतान न मिलने पर उसने कई बार अधिकारियों से संपर्क किया, यहां तक कि पिछले वर्ष आमरण अनशन भी किया था। सामाजिक कार्यकर्ता सूरज लोखंडे के अनुसार, पूर्व मंत्री दीपक केसरकर ने उस समय भुगतान का आश्वासन दिया था, लेकिन राशि जारी नहीं हुई, जिससे वह अवसाद में चला गया।

सरकार और पूर्व मंत्री के बयान

घटना के बाद महाराष्ट्र शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि रोहित आर्या या उसकी संस्था का विभाग से कोई आधिकारिक संबंध नहीं था और न ही किसी प्रोजेक्ट के लिए कोई सरकारी मंजूरी दी गई थी।

वहीं, पूर्व स्कूली शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने कहा कि उनका नाम बेवजह घसीटा जा रहा है। उन्होंने कहा, रोहित आर्या को एक सरकारी अभियान के तहत ठेका दिया गया था, लेकिन विभागीय प्रक्रियाओं में समय लगता है। यदि कोई बकाया था तो उसे विभाग से संवाद करना चाहिए था। बंधक बनाना कोई समाधान नहीं है।

परिवार और व्यक्तिगत स्थिति

रोहित आर्या की पत्नी आईसीआईसीआई बैंक में कार्यरत हैं और उसका एक बेटा है। परिवार पुणे के कोथरुड इलाके में रहता है। पड़ोसियों के अनुसार, रोहित पिछले कुछ महीनों से गहरे तनाव में था। उसके 70 वर्ष से अधिक उम्र के माता-पिता भी मुंबई पहुंच चुके हैं; पिता हृदय रोग से पीड़ित बताए जा रहे हैं।

मुंबई पुलिस ने इस पूरे मामले को लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आर्या ने बंधक नाटक की योजना कब और कैसे बनाई, और क्या उसके पीछे किसी और की भूमिका थी। मुंबई पुलिस कमिश्नर ने कहा, हमारी प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा थी। सभी को सुरक्षित बचा लिया गया। अब घटना की सभी एंगल से जांच की जा रही है।

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