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रक्षाबंधन 2026 पर चंद्र ग्रहण का साया! जानें कब लगेगा सूतक काल

वेब डेस्क :- रक्षाबंधन, भाई-बहन के बीच प्यार और स्नेह के अटूट बंधन का प्रतीक पवित्र त्योहार, इस साल अपने साथ एक बहुत ही खास और दुर्लभ खगोलीय संयोग लेकर आ रहा है। इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण श्रावण पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन ही लगने वाला है। इस खगोलीय घटना के दौरान कई जगहों पर शानदार ‘ब्लड मून’ दिखाई देगा, जिससे लोगों के मन में कई तरह के संदेह और सवाल उठेंगे। आइए, इस ग्रहण से जुड़ी सभी जरूरी और महत्वपूर्ण जानकारियों के बारे में जानते हैं।

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कब और कितने बजे लगेगा चंद्र ग्रहण?
खगोल विज्ञान और पंचांग के अनुसार, साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त, 2026 को लगेगा। भारतीय मानक समय के अनुसार, यह ग्रहण सुबह 06:53 बजे शुरू होगा और दोपहर 12:31 बजे तक चलेगा—यानी इसकी कुल अवधि लगभग 5 घंटे 39 मिनट होगी। इस घटना के दौरान एक दिलचस्प खगोलीय नजारा देखने को मिलेगा, जिसमें पृथ्वी की गहरी छाया (अम्ब्रा) चंद्रमा के लगभग 93 से 96 प्रतिशत हिस्से को ढक लेगी। नतीजतन, चंद्रमा पूरी तरह काला दिखने के बजाय गहरे तांबे जैसे लाल रंग का दिखाई देगा। इस घटना को “ब्लड मून” कहा जाता है।
क्या भारत में नजर आएगा चंद्र ग्रहण?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा। आपको बता दें कि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह मुख्य रूप से यूरोप, पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और अटलांटिक व प्रशांत महासागर के इलाकों में दिखाई देगा। चूंकि ग्रहण के समय भारत में दिन का उजाला होगा, इसलिए देश में इसकी दृश्यता शून्य होगी।
क्या भारत में मान्य होगा सूतक काल?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण से लगभग नौ घंटे पहले ‘सूतक’ काल शुरू हो जाता है। इस दौरान सभी शुभ कार्य वर्जित होते हैं और मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। चूंकि, 28 अगस्त को होने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए देश में ‘सूतक’ काल लागू नहीं होगा। सूतक न होने के कारण देश में किसी भी प्रकार के धार्मिक नियमों या पाबंदियों का पालन करने की आवश्यकता नहीं है। मंदिर खुले रहेंगे। सामान्य पूजा-पाठ जारी रह सकेगा।
क्या रक्षाबंधन के त्योहार या राखी बांधने पर पड़ेगा कोई असर?
चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और इसमें कोई ‘सूतक काल’ भी नहीं है, इसलिए रक्षाबंधन के त्योहार पर इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। बहनें बिना किसी हिचकिचाहट या चिंता के पूरे दिन अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। पंचांग के अनुसार, ‘उदय तिथि’ (सूर्योदय के समय की तिथि) होने के कारण यह पूरा दिन त्योहार मनाने के लिए शुभ है। हालांकि, परंपरा का पालन करते हुए ‘भद्रा काल’ जैसे समय का ध्यान रखा जा सकता है।

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