Home Featured Study-कोरोना से बच्चों को कितना खतरा ?

Study-कोरोना से बच्चों को कितना खतरा ?

AIIMS की स्टडी में हुआ खुलासा, कोरोना से बच्चों को कितना है खतरा ?

by Wev Desk

हेल्थ डेस्क :- AIIMS के डॉक्टरों द्वारा की गई स्टडी में पता चला है कि कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर के दौरान वयस्कों की तुलना में किशोरों में हल्के लक्षण और कम मृत्य दर देखने को मिला है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों ने यह अध्ययन कोरोना महामारी से पीड़ित 197 रोगियों पर की। जो 12 से 18 वर्ष की आयु के थे और जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, इससे यह निष्कर्ष निकला है |

यह भी पढ़ें ….. तेजी से फैल रहा Omicron,WHO की चेतावनी – unique 24 News (unique24cg.com)

कोरोना महामारी को फैलाने वाले एसआरएस-सीओवी-2 के हर कण का व्यास करीब 80 नैनोमीटर होता है, हर कण में वायरस के जेनेटिक कोड यानी आरएनए की एक गेंद होती है | उसकी रक्षा करता है एक स्पाइक प्रोटीन यानी यानी बाहर की तरफ निकले हुए मुकुट जैसे उभार जिनकी वजह से वायरस को यह नाम मिला है, यह वायरस कोरोनावायरस परिवार का एक हिस्सा है, जिसके और भी सदस्य हैं |

15 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों के 3 जनवरी से टीकाकरण शुरू होने के कारण डॉक्टर अस्पताल में भर्ती इन रोगियों के क्लिनिकल ​​प्रोफाइल का अध्ययन करना चाहते थे। विश्लेषण से पता चलता है कि 84.6% किशोरों में हल्की बीमारी, 9.1% में मध्यम बीमारी और 6.3% में गंभीर बीमारी के लक्षण दिखाई दिए। इन लोगों में बुखार और खांसी सबसे आम लक्षण थे जिनमें से 14.9% ने इसका अनुभव किया। विश्लेषण के अनुसार, 11.5% बच्चों के शरीर में दर्द था, 10.4% बच्चे थके हुए महसूस कर रहे थे और 6.2% बच्चों को सांस लेने में तकलीफ आई। जबकि सिर्फ 24.1% बच्चों को ही स्टेरॉयड और 16.9% बच्चों को रेमेडिसविर दी गई। अध्ययन में यह भी देखा गया कि इस आयु वर्ग में 3.1% मृत्यु दर दर्ज की गई जबकि दूसरी लहर के दौरान उसी अस्पताल में वयस्कों के मामले में 19.1% मृत्यु दर दर्ज की गई।

इन अध्यनों के आधार पर एम्स में पल्मोनोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ अनंत मोहन ने कहा कि हमने किशोरों के क्लिनिकल प्रोफाइल को सामने लाने का प्रयास किया है, यह संभवत: भारत की ओर से इस तरह का पहला डेटा सेट है। अब तक हम मुख्य रूप से वयस्कों में कोरोना के लक्षणों और उपचारों पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे। जबकि हमने देखा कि दूसरी लहर के दौरान भर्ती हुए बच्चे काफी गंभीर थे। वयस्कों की तुलना में इस आयु वर्ग में मृत्यु दर कम है।

कला,धर्म,संसकृति एवं समाचार सहित देश दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स के लिये

हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें 👇

Unique 24 CG – YouTube

You may also like

Leave a Comment