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गोवा का वो चर्च जहां आज भी राजाओ की पहरेदारी

वेब-डेस्क :- गोवा अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक स्थलों और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यहां के कुछ स्थान ऐसे भी हैं जो अपनी रहस्यमय कहानियों और भूतिया कथाओं के लिए जाने जाते हैं। इन्हीं में से एक है थ्री किंग्स चर्च, जो सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक और अलौकिक रहस्य से जुड़ा स्थान है। यह चर्च क्यूलिम पहाड़ी पर स्थित है और यहां की लोककथाएँ, भूतिया घटनाएँ, और ऐतिहासिक घटनाएँ इसे एक रहस्यमय स्थल बनाती हैं

थ्री किंग्स चर्च की कहानी

थ्री किंग्स चर्च, जिसे आवर लेडी ऑफ रेमेडीज चैपल के नाम से भी जाना जाता है, 1599 में पुर्तगाली मिशनरी फादर गोंकालो कार्वाल्हो द्वारा स्थापित किया गया था। यह चर्च उस समय के पुर्तगाली शासन के दौरान स्थापित हुआ था, जब गोवा में पुर्तगाली साम्राज्य का प्रभुत्व था। इस चर्च का संबंध बाइबिल के तीन बुद्धिमान राजाओं से है, जिन्हें ‘तीन राजा’ कहा जाता है। ये तीन राजा यीशु के जन्म के समय उनसे मिलने आए थे और उन्हें उपहार देने के लिए प्रसिद्ध हैं।

 

लेकिन चर्च की स्थानीय किंवदंती और इतिहास इससे कहीं अधिक दिलचस्प है। कहते हैं कि चर्च का नाम तीन राजाओं के कारण नहीं, बल्कि एक और घटनाक्रम के कारण पड़ा। ये तीन राजा गोवा के पुर्तगाली शासक थे, जो एक समय इस इलाके पर शासन करते थे। इन राजाओं में से एक ने सत्ता की लालच में बाकी दो राजाओं को जहर देकर मार डाला। इसके बाद, शर्म और अपराधबोध के कारण, उस राजा ने भी खुद को जहर दे लिया। इस घटना के बाद इन तीनों राजाओं के शवों को थ्री किंग्स चर्च में दफनाया गया, माना जाता है कि मरने के बाद भी इन तीनों राजाओं की आत्माएं इस चर्च और इसके आसपास के इलाके में भटकती रहती हैं। और यहीं से चर्च से जुड़ी भूतिया कथाएँ शुरू हुईं।

भूतिया घटनाएँ और भूतों का जुलूस

चर्च से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कहानी वह है, जिसमें तीन राजाओं के भूतों का जुलूस निकलता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब सूर्यास्त के बाद अंधेरा छा जाता है, तो इन तीन राजाओं की आत्माएँ चर्च के आस-पास और क्यूलिम पहाड़ी पर भटकती हैं। कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने रात के समय तीन राजाओं को एक जुलूस में चलते देखा, जैसे वे किसी धार्मिक उत्सव में शामिल हो रहे हों। यह जुलूस हमेशा अजीब तरीके से दिखाई देता है और लोग इसे भूतिया जुलूस के रूप में पहचानते हैं।

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इसके अलावा, स्थानीय निवासियों और पर्यटकों ने चर्च के अंदर और इसके आसपास अजीब आवाजें, ठंडी हवाएँ, और दरवाजों का अपने आप खुलना-बंद होना जैसी घटनाएँ महसूस की हैं। इन घटनाओं ने थ्री किंग्स चर्च को एक भूतिया स्थल बना दिया है। हालांकि वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं, लेकिन स्थानीय लोग और कई पर्यटक इसे अलौकिक गतिविधि मानते हैं।

सिक्के उछालने की कहानी

पिछले समय में, जब बिजली नहीं होती थी, तो गांव वाले पहाड़ी पर अजीब रोशनी देखते थे। कुछ समय बाद यह पता चला कि यह रोशनी उन युवाओं की थी जो खुद को कंबल में लपेटकर सिक्के ढूंढने जाते थे। ये सिक्के थ्री किंग्स फेस्टिवल से संबंधित थे, जिसमें हर साल 6 जनवरी को तीन राजाओं का उत्सव मनाया जाता है। यह उत्सव खुशी, मिठाईयों, और भव्य जुलूस से भरा होता है। इस दौरान सिक्के गिर जाते थे, जिन्हें बाद में कुछ लोग इकट्ठा करते थे।

तीन राजाओं का उत्सव

हर साल 6 जनवरी को, कैनसौलिम गांव में तीन राजाओं का उत्सव मनाया जाता है। यह उत्सव धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का है और गोवा के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन गांव में एक बड़ा जुलूस निकलता है, जिसमें बच्चे तीन राजाओं के कपड़े पहनकर पहाड़ी की ओर बढ़ते हैं। यह जुलूस चर्च के पास स्थित थ्री किंग्स चैपल तक जाता है, जहां लोग पूजा-अर्चना करते हैं और सामूहिक रूप से दावत का आयोजन करते हैं।

इस उत्सव में स्थानीय लोग मिठाइयाँ और पारंपरिक व्यंजन खाते हैं, जबकि बाजार में विभिन्न प्रकार की सामग्री और हस्तशिल्प बिकते हैं। यह एक उत्सवपूर्ण माहौल होता है, लेकिन जैसे ही शाम ढलती है, बाजार और दावत की गतिविधियाँ बंद हो जाती हैं और स्थानीय लोग चर्च और उसके आस-पास के क्षेत्र से बाहर चले जाते हैं। इसे एक रहस्यमय घटना के रूप में देखा जाता है, क्योंकि सूर्यास्त के बाद इस क्षेत्र में कोई नहीं रहना चाहता।

प्रेतवाधित घटनाएं और रहस्यमयी अनुभव

अजीब आवाजें: स्थानीय निवासियों और पर्यटकों का दावा है कि उन्होंने चर्च के अंदर से रहस्यमयी फुसफुसाहटें, कराहने जैसी आवाजें और कदमों की आहटें सुनी हैं।

अदृश्य शक्तियों की उपस्थिति: कई लोग चर्च के पास पहुँचते ही अचानक असहज महसूस करने की बात बताते हैं — जैसे कोई अदृश्य शक्ति उनका पीछा कर रही हो या निगाहें उन पर टिकी हों।

प्रवेश वर्जित: सूर्यास्त के बाद चर्च के भीतर प्रवेश करना मना है। स्थानीय प्रशासन भी आगंतुकों को चेतावनी देता है कि रात के समय यहां न जाएं।

पर्यटन और जिज्ञासा भले ही थ्री किंग्स चर्च एक डरावना स्थान माना जाता है, लेकिन यह रोमांच प्रेमियों और साहसिक पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। दिन के समय यहां से अरब सागर का मनोरम दृश्य देखने को मिलता है। पुराने पुर्तगाली स्थापत्य कला के साथ-साथ यहां का एकांत वातावरण भी इस जगह को खास बनाता है।

 

लोककथाएँ और अन्य घटनाएँ

लापता पुजारी और गुफा की कहानी

थ्री किंग्स चर्च के भीतर एक प्राचीन गुफा है, जो कभी एक अज्ञात स्थान तक जाती थी। एक कथा के अनुसार, एक पुजारी अपने कुत्ते के साथ उस गुफा में गया था और फिर वह कभी वापस नहीं लौटा। कुत्ता अकेला वापस आया, जिससे यह कहानी और भी रहस्यमय हो गई। बाद में, इस गुफा को बंद कर दिया गया था ताकि ऐसी घटनाएँ न हो। गोवा की कई गुफाओं में इस तरह की लापता होने की कथाएँ प्रचलित हैं, और यह सच भी हो सकती हैं या नहीं, यह केवल एक रहस्य बना हुआ है।

क्या यह सच है?

स्थानीय निवासियों और पर्यटकों की गवाही यह बताती है कि थ्री किंग्स चर्च में वास्तव में कुछ असामान्य घटनाएँ होती हैं, लेकिन क्या यह सब सच है, इस पर संदेह बना हुआ है। Indian Paranormal Society और अन्य समूहों ने इसे भारत के सबसे प्रेतवाधित स्थानों में से एक के रूप में मान्यता दी है, लेकिन ठोस वैज्ञानिक प्रमाण अभी तक सामने नहीं आए हैं।

थ्री किंग्स चर्च एक ऐतिहासिक स्थल है, जहां धर्म, संस्कृति, और रहस्य का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। इसके भूतिया जुलूस, तीन राजाओं की आत्माएँ और तीन राजाओं का उत्सव इसे एक अद्वितीय स्थल बनाते हैं। चाहे आप इन कथाओं पर विश्वास करें या न करें, इस चर्च के वातावरण और इसके रहस्यों ने इसे गोवा का एक प्रमुख आकर्षण बना दिया है। यह स्थान न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि एक यात्रा के रूप में भी काफी आकर्षक है

यह चर्च आज भी अपने भीतर अनकहे रहस्यों और अनदेखी कहानियों को समेटे खड़ा है — एक मौन गवाह बनकर।

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