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अघोरी बाबाओं का रहस्यमय सच: लाश से भी बनाते हैं संबंध

अघोरी बाबाओं का परिचय और उनकी साधना

अघोरी बाबा भारतीय साधु-संतों की एक विशेष श्रेणी में आते हैं, जिनका जीवन और साधना रहस्य और चुनौती से भरा होता है। अघोरी परंपरा की उत्पत्ति प्राचीन समय में हुई थी और यह शिव के अनुयायियों के रूप में मानी जाती है। अघोरी बाबाओं का जीवन साधारण जनजीवन से अलग और कठिन होता है, क्योंकि वे उन साधनाओं का अभ्यास करते हैं जो साधारण लोगों के लिए अकल्पनीय और अप्रिय हो सकती हैं।

अघोरी बाबाओं की साधना अत्यंत कठिन और रहस्यमय होती है। वे शवों के साथ साधना करते हैं और श्मशान घाटों को अपने तपस्या स्थल के रूप में चुनते हैं। अघोरी बाबाओं का मानना है कि मृत्यु जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है और मृत्यु के बाद भी आत्मा की यात्रा जारी रहती है। इसीलिए, वे शवों के साथ संबंध बनाने और उन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए जाने जाते हैं।

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अघोरी साधना की प्रमुख विधियों में तंत्र-मंत्र, योग, ध्यान और विभिन्न प्रकार की तपस्याएं शामिल हैं। अघोरी बाबा अपने तपस्या के दौरान अक्सर भयानक और विक्राल रूप धारण करते हैं, जो उनके साधना की गंभीरता और संकल्प को दर्शाता है। वे अपने शरीर पर राख मलते हैं, जिसे वे शवों की राख मानते हैं, और इसे पवित्र मानते हैं।

अघोरी बाबाओं का जीवन दर्शन भी अत्यंत अनूठा और गहरा होता है। वे जीवन और मृत्यु के बीच की सीमाओं को मिटाने का प्रयास करते हैं और मानते हैं कि सभी जीवों में एक ही ऊर्जा का प्रवाह होता है। उनका उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और परमात्मा के साथ एकाकार होना है। अघोरी साधु इस मार्ग पर चलकर अपने मन और शरीर को संयमित करते हैं और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होते हैं।

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अघोरी बाबाओं के जीवन का रहस्यमय पक्ष

अघोरी बाबाओं का जीवन सामान्य जनमानस के लिए एक रहस्य से कम नहीं है। इनकी विचित्र और अजीब आदतें अक्सर लोगों को हैरान कर देती हैं। अघोरी बाबा श्मशान घाट में रहना पसंद करते हैं, जहां वे शव साधना करते हैं। शव साधना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अघोरी साधक शवों के साथ ध्यान और मंत्रोच्चारण करते हैं। इसके पीछे उनका मानना है कि यह साधना उन्हें मोक्ष और आत्मज्ञान की ओर ले जाती है।

अघोरी बाबाओं के जीवन का एक और रहस्यमय पहलू है मानव हड्डियों का उपयोग। वे मानव कपाल (खोपड़ी) का उपयोग पूजा और ध्यान के दौरान करते हैं। इनके लिए मानव कपाल एक पवित्र वस्तु होती है, जो उन्हें आत्मिक शक्ति प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, अघोरी बाबा अक्सर अपने शरीर पर राख लगाते हैं, जो श्मशान घाट से ली जाती है। यह राख उन्हें मृत्यु और जीवन के चक्र की याद दिलाती है और उन्हें अपने साधना में गहराई तक ले जाती है।

श्मशान में रहना और मृतकों के साथ संबंध बनाना अघोरी बाबाओं की साधना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह उन्हें भय और मृत्यु के डर से मुक्त करता है। उनके अनुसार, मृत्यु को निकट से देखने और उसे स्वीकार करने से ही आत्मज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। अघोरी बाबाओं का मानना है कि यह रहस्यपूर्ण जीवन उन्हें भगवान शिव के करीब ले जाता है, जो अघोर पंथ के मुख्य देवता हैं।

अघोरी बाबाओं के इस रहस्यमय जीवन के पीछे कई कारण हो सकते हैं। एक प्रमुख कारण यह है कि वे समाज की सीमाओं और परंपराओं से परे जाकर आत्मज्ञान की खोज में लगे रहते हैं। उनके लिए श्मशान और शव साधना सिर्फ साधना के साधन नहीं हैं, बल्कि वे उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।

कुत्‍तों से करते हैं प्रेम

अघोरी बाबाओं का ना केवल जीवन, भगवान की भक्ति करने का अनूठा तरीका ही नहीं है. साथ ही अघोरी बाबा की वेशभूषा भी खासी अजीब होती है. अघोरी बाबा अपने शरीर पर राख लपेटते हैं, लंबी-लंबी जटाएं रखते हैं. साथ ही कई अघोरी बाबा जानवरों की खाल पहनते हैं. अघोरियों को कुत्‍तों से बहुत प्रेम होता है, वे हमेशा अपने साथ कुत्‍ता रखते हैं. इसके अलावा अघोरी बाबा कई तरह के नशे भी करते हैं.

लाश से संबंध बनाने की प्रथा और उसके पीछे की मान्यताएँ

अघोरी बाबाओं का जीवन रहस्यमयता से भरा होता है, और उनकी प्रथाओं में से एक सबसे विवादास्पद प्रथा है लाश से संबंध बनाना। इस प्रथा को लेकर समाज में कई मिथक और सच्चाइयाँ फैली हुई हैं। अघोरी बाबाओं के अनुसार, यह प्रथा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखती है। वे मानते हैं कि लाश से संबंध बनाना उन्हें मरणोपरांत जीवन की सच्चाईयों से अवगत कराता है।

अघोरी बाबाओं के लिए लाश से संबंध बनाना एक आध्यात्मिक अभ्यास है, जो उन्हें मृत्यु के डर से मुक्त करता है। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया से वे अपनी आत्मा को शुद्ध कर सकते हैं और उच्चतम आध्यात्मिक स्तर प्राप्त कर सकते हैं। इसके पीछे की मान्यता यह है कि मृत्यु और जीवन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और इस प्रथा के माध्यम से वे इन दोनों पहलुओं को समझने की कोशिश करते हैं।

समाज में इस प्रथा को लेकर कई मिथक प्रचलित हैं, जिनमें अघोरी बाबाओं को डरावना और असामान्य माना जाता है। हालांकि, यह सच है कि अघोरी बाबाओं का जीवन सामान्य मानवीय सीमाओं से परे होता है, लेकिन उनकी प्रथाओं का उद्देश्य आत्मज्ञान प्राप्त करना होता है।

अघोरी बाबाओं की दृष्टि से लाश से संबंध बनाने की प्रथा के कई लाभ हैं। उनका मानना है कि यह प्रथा उन्हें मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, वे इसे अपने भीतर के भय और सामाजिक बंधनों से मुक्ति का माध्यम मानते हैं।

हालांकि, इस प्रथा के कई नकारात्मक पहलू भी हैं। समाज इसे नैतिकता के विपरीत मानता है और इसे अस्वीकार्य ठहराता है। इस प्रथा के कारण अघोरी बाबाओं को समाज द्वारा बहिष्कृत किया जाता है और उनका जीवन कठिनाइयों से भरा होता है।

अघोरी बाबाओं के जीवन और उनकी प्रथाओं के पीछे छिपे रहस्यों को समझने के लिए हमें उनकी दृष्टिकोण से देखना होगा। यह प्रथा उनके लिए आध्यात्मिक मार्ग का हिस्सा है, जिसे वे अपने तरीके से अपनाते हैं।

अघोरी बाबाओं के प्रति समाज का दृष्टिकोण और उनकी वास्तविकता

समाज में अघोरी बाबाओं के प्रति दृष्टिकोण अक्सर रहस्य और अंधविश्वास से भरा होता है। अघोरी बाबाओं को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल और धारणाएँ होती हैं, जिनमें से कई मिथकों और अफवाहों पर आधारित हैं। अघोरी बाबाओं की साधनाओं और जीवनशैली को लेकर समाज में एक अजीब सा भय और आकर्षण दोनों ही देखने को मिलता है। अघोरी बाबाओं को अक्सर लाशों से संबंध बनाने और तंत्र-मंत्र में लिप्त दिखाया जाता है, जो उनके प्रति समाज की धारणा को और भी रहस्यमय बनाता है।

अघोरी बाबाओं की वास्तविकता इससे काफी अलग हो सकती है। उनका जीवन साधारण नहीं होता, लेकिन उनकी साधनाएँ केवल तंत्र-मंत्र और लाशों तक सीमित नहीं होतीं। वे ध्यान और साधना के माध्यम से आत्मज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। उनकी साधनाएँ कई बार समाज के पारंपरिक नियमों और धारणाओं से परे होती हैं, जिसके चलते उनके प्रति लोगों में भ्रम और डर की स्थिति बनी रहती है। अघोरी बाबाओं का जीवन समाज के अन्य साधुओं और संतों से भिन्न होता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वे सभी नकारात्मक या खतरनाक होते हैं।

मीडिया और साहित्य में अघोरी बाबाओं की छवि अक्सर विकृत और अतिरंजित रूप में प्रस्तुत की जाती है। फिल्मों और टीवी शो में उन्हें अक्सर खतरनाक और विचित्र साधुओं के रूप में दिखाया जाता है, जो समाज में उनके प्रति गलत धारणाओं को और भी मजबूती से स्थापित करता है। वास्तविकता में, अघोरी बाबाओं का जीवन और साधनाएँ एक गहरे आध्यात्मिक और दार्शनिक दृष्टिकोण पर आधारित होती हैं। उनकी साधनाएँ किसी भी साधारण व्यक्ति के लिए समझ पाना कठिन हो सकता है, लेकिन यह उन्हें पूरी तरह से समझे बिना निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

अघोरी बाबाओं के प्रति समाज का दृष्टिकोण और उनकी वास्तविकता के बीच का अंतर काफी बड़ा है। आवश्यक है कि हम उनके बारे में सही जानकारी प्राप्त करें और उनके जीवन और साधनाओं को समझने का प्रयास करें। इससे न केवल अघोरी बाबाओं के प्रति समाज की धारणाओं में सुधार होगा, बल्कि उनके वास्तविक योगदान और साधनाओं को भी सही परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकेगा।

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( Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और विभिन्न माध्यमों से प्राप्त जानकारियों पर आधारित है | Unique 24 News इसकी पुष्टि नहीं करता है )

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