Site icon unique 24 news

स्वर्णिम छत्तीसगढ़ के लिए साहित्यकारों और विद्वानों की चिंतन बैठक

रायपुर। राजधानी रायपुर में सोमवार को थिंक आईएएस संस्थान में स्वयंसेवी सामाजिक संगठन पीपला वेलफेयर फाउंडेशन छत्तीसगढ़ के संयोजन से साहित्यकारों और विद्वानों की बैठक-सह विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, विद्वानों और पत्रकारों ने सम्मिलित होकर स्वर्णिम छत्तीसगढ़ बनाने की दिशा में विचार-विमर्श किया। गोष्ठी में समाज के समक्ष खड़ी विभिन्न चुनौतियों और लगातार बढ़ रही अराजकता पर चिंता जताई गई और उनके समाधान के उपाय सुझाए गए।

समाज के समक्ष चुनौतियाँ

वरिष्ठ साहित्यकार माणिक विश्वकर्मा ने कहा कि आज समाज नशावृत्ति, अनियंत्रित जनसंख्या, जल संकट, प्रदूषण, इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट और ध्वनि प्रदूषण जैसी अनेक गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। यदि इन पर समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो ये समस्याएँ विकास की राह में बड़ी रुकावट बन जाएंगी और स्वर्णिम छत्तीसगढ़ का सपना अधूरा रह जाएगा।
भाषाविद् डॉ. चितरंजन कर ने बदलते समय में बच्चों के नैतिक मूल्यों, शिक्षा और संस्कार पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा की जड़ें मजबूत होंगी, तभी छत्तीसगढ़ का भविष्य उज्जवल बन पाएगा और स्वर्णिम छत्तीसगढ़ की कल्पना साकार हो सकेगी।शिक्षा और सामाजिक मूल्यों की भूमिका पर शिक्षाविद् एवं थिंक आईएएस के डायरेक्टर मुरली मनोहर देवांगन ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर विचार रखते हुए कहा कि शिक्षा के बिना किसी राज्य या समाज का विकास संभव नहीं है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही वह माध्यम है, जिससे भविष्य की पीढ़ी संस्कारवान बनेगी और राज्य का भविष्य सुनहरा होगा। नेत्र विशेषज्ञ एवं गहन चिंतनशील डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने बच्चों और समाज में मोबाइल एवं तकनीक के बढ़ते उपयोग पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मोबाइल का अत्यधिक प्रयोग बच्चों में पढ़ाई और सामाजिक व्यवहार दोनों पर प्रतिकूल असर डाल रहा है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।पीपला फाउंडेशन के संरक्षक पारसनाथ साहू ने कहा कि यदि समाज में बढ़ती अराजकता और अव्यवस्था पर समय रहते रोकथाम नहीं की गई तो स्वर्णिम छत्तीसगढ़ का सपना सिर्फ कल्पना बनकर रह जाएगा। उन्होंने अनुशासन और जागरूकता को समाज सुधार का सबसे बड़ा हथियार बताया।

यह भी पढ़े … राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने के बाद शिल्पा राव पहुंचीं अपने होमटाउन रांची – unique 24 news

साहित्यकारों व पत्रकारों के सुझाव
बैठक में वरिष्ठ साहित्यकार रामकुमार शर्मा और वरिष्ठ पत्रकार बाबूलाल मिश्रा ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि साहित्य और पत्रकारिता समाज का आईना हैं, और इन्हीं के माध्यम से लोगों में सकारात्मक सोच और बदलाव का संदेश फैलाया जा सकता है।
इसी कड़ी में वरिष्ठ साहित्यकार अरविंद मिश्रा, सुखनवर हुसैन, नरेन्द्र वर्मा, इन्द्रदेव यदु तथा अन्य उपस्थित विद्वानों ने भी अपने-अपने सुझाव दिए और कहा कि शिक्षा, संस्कार, संस्कृति एवं सामाजिक समरसता को मजबूत किए बिना स्वर्णिम छत्तीसगढ़ का निर्माण असंभव है।
संगठन की सराहना और सम्मान

सभी वक्ताओं ने पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के इस प्रयास की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और कहा कि इस तरह की पहल समाज को नई दिशा देने वाली है। विचार गोष्ठी के अंत में थिंक आईएएस संस्थान की ओर से सभी साहित्यकारों और वक्ताओं का शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में पीपला फाउंडेशन से संरक्षक पारसनाथ साहू, अध्यक्ष दूजेराम धीवर, संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल, मार्गदर्शक सदस्य शशांक खरे, शिक्षा-विद् मुरली मनोहर देवांगन, कोषाध्यक्ष कोमल लाखोटी, सदस्य प्रतीक टोंड्रे सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार और चिंतकगण उपस्थित रहे। बैठक सह गोष्ठी सकारात्मक विचारों और सामूहिक संकल्प के साथ संपन्न हुई। उपस्थित सभी विद्वानों ने एक स्वर में यह संदेश दिया कि समाज में अनुशासन, शिक्षा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देकर ही स्वर्णिम छत्तीसगढ़ के सपने को हकीकत बनाया जा सकता है।

देश दुनिया की ताजातरीन खबरों के लिए

हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें….

Unique 24 Bharat – YouTube

Exit mobile version