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छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में तीन माओवादियों ने हिंसा त्याग किया आत्मसमर्पण

गरियाबंद:- नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत छत्तीसगढ़ की गरियाबंद पुलिस की अपील और शासन की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के डीजीएन डिवीजन के तीन माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पित माओवादियों में नागेश उर्फ रामा कवासी, जैनी उर्फ देवे मडकम और मनीला उर्फ सुंदरी कवासी शामिल हैं, जिन पर कुल 3 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

आत्मसमर्पित माओवादियों का विवरण
नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत शासन की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति तथा गरियाबंद पुलिस के समर्पण हेतु अपील से प्रभावित होकर आज प्रतिबंधित संगठन सीपीआई माओवादी के डीजीएन डिवीजन के 03 माओवादियों द्वारा हिंसा एवं विनाष के मार्ग को त्याग कर आत्मसमर्पण किया जा रहा है। आत्मसमर्पित माओवादियों का विवरण निम्नानुसार है-

(01) नागेश उर्फ रामा कवासी –

(02) जैनी उर्फ देवे मडकम –

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(03) मनीला उर्फ सुंदरी कवासी –

माओवादियों कि खोखली हो चुकी विचारधारा

वर्तमान में माओवादियों कि खोखली हो चुकी विचारधारा व माओवादियों के दूषित नीतियों के बारे में तीनो माओवादियों ने बताया कि आज माओवादी निर्दोष ग्रामीणों की पुलिस मुखबीरी के शक में जबरन हत्या, लोगों को बेवजह राशन-सामानों के लिए परेशान करना, शासन के विकास कार्यो को नुकसान पहुचाना या पूरा नहीं होने देना, बस्तर के छोटे-छोटे युवक-युवतियों को बहला-फुसला या उनके परिवार वालो को डरा धमका का माओवादी संगठन में शामिल करना, बडे माओवादियों द्वारा छोटे कैडरों का शोषण करना, स्थानीय लोगो को शासन के विरूद्व आंदोलन के लिए उकसाना एवं निर्माण कार्यो से जुडे ठेकेदारो से अवैध वसूली करने के लिए माओवादी संगठन को अड्डा बना लिये है। इन्ही सब स्थितियों को देखते हुये तथा हमारे साथियों द्वारा लगातार किये जा रहे समर्पण से प्रभावित होकर।

परिवार के साथ खुषहाल जीवन बिताने के लिए आत्मसर्मपण के मार्ग

शासन की आत्मसमर्पण-पुनर्वास नीति के समक्ष समर्पण करने पर पद अनुरूप ईनाम राशि की सुविधा, हथियार के साथ समर्पण करने पर ईनाम राशि की सुविधा, बिमार होने पर स्वास्थ्य सुविधा, आवास की सुविधा, रोजगार की सुविधा को देखते हुये हमारे कई माओवादी साथी (आयतु, संजय, मल्लेश, मुरली, टिकेश, प्रमीला, लक्ष्मी, मैना, क्रांति, राजीव, ललिता, दिलीप, दीपक, मंजुला, सुनीता, कैलाश, रनिता, सुजीता, राजेन्द्र, दीपक, जानसी) आत्मसमर्पण कर शासन के इन्ही योजनाओं का लाभ उठा रहे है, जिसके बारे में हम लोगो को समाचार पत्रो व स्थानीय ग्रामीणों के माध्यम से जानकारी मिलता था। गरियाबंद पुलिस द्वारा जंगल-गांवों में प्रचारित समर्पण नीति के पोस्टर-पाम्पलेट मिलते थे, जिससे हम लोगों के मन विचार आया कि हम लोग क्यों जंगल में पशुओं की तरह दर-दर भटक रहे है और इन बडे माओवादी कैडरो की गुलामी कर रहे है। माओवादियों की खोखली हो चुकी विचारधारा, जंगल की परेशानियां, शासन की पुनर्वास नीति तथा आत्मसमर्पित साथियों के खुशहाल जीवन से प्रभावित होकर हम लोग भी अपने परिवार के साथ खुषहाल जीवन बिताने के लिए आत्मसर्मपण के मार्ग को अपनाये है।

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