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Tradition: सगी बहनों की तरह रहती हैं सौतनें, मर्द करते हैं 2 शादियां

अनोखी है यह परंपरा

भारत के कई गांवों में अनेक अजीबोगरीब परंपरा देखने को मिलती हैं, लेकिन कुछ परंपरा समाज के विभिन्न पहलुओं को विशेष प्रकार से प्रदर्शित करती हैं। एक ऐसे ही गांव में मर्दों की 2 शादियां करने की परंपरा है, जहां उनकी सौतनें एक सगी बहन की तरह रहती हैं। यह परंपरा स्थानीय जीवन में गहराई से पैठी हुई है और इसके पीछे कई सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारण हैं।

इस गांव में मर्दों का दो शादियां करने का निर्णय अक्सर सामूहिक रूप से लिया जाता है। युवा पुरुष पारिवारिक दबाव और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए दूसरी शादी करने की सोचते हैं। बुनियादी कारणों में से एक यह है कि कई परिवारों में अभी भी बेटियों की कमी के कारण दूसरी पत्नी को लेकर समाज में अधिक स्वीकार्यता है। इस प्रकार, जब एक परिवार आर्थिक रूप से सक्षम होता है, तो उस स्थिति में दो शादियां करने का विचार आम हो जाता है।

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सांस्कृतिक दृष्टि से, यहां दो सौतनें अक्सर एक-दूसरे के साथ अच्छे रिश्ते में रहती हैं। यह न केवल परिवार के सदस्यों के बीच एकता को बढ़ावा देता है, बल्कि बच्चों की देखभाल और घरेलू कार्यों में भी सहयोग को सुनिश्चित करता है। यह परंपरा गांव में सहिष्णुता, सहयोग और प्यार का परिचायक बन चुकी है। इस वजह से, जब भी कोई नए रिश्ते की शुरुआत होती है, तो अपनी धारणा के अनुसार, यह दोनों पत्नियों को समान अधिकार देने का प्रयास किया जाता है।

इस प्रकार, यह परंपरा न केवल पारिवारिक संरचना को प्रभावित करती है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को भी प्रभावित करती है। इसलिए, इस अनोखी प्रथा का वैावहिक मूल्य समझना आवश्यक है।

कंहा है यह परंपरा

यह प्रथा है राजस्थान के रामदेयो की बस्ती में , जहां पुरुष दो पत्नियां रखते हैं और तीनों एक साथ एक ही घर में रहते हैं। यह स्थिति भारतीय समाज की पारंपरिक धारणाओं से बिलकुल अलग है। इस गांव में देखा गया है कि दो पत्नियों के बीच तनाव या विवाद की कोई स्थिति नहीं होती। वे एक-दूसरे के साथ सहभोजी और सगी बहनों की तरह रहती हैं। यह सामंजस्य और प्रेम की अनोखी मिसाल है।

सौतनों के संबंध

भारत के कुछ गांवों में 2 शादियां एक आम बात है, जहां पुरुष एक साथ दो पत्नियों को रख सकते हैं। इस परंपरा में, सौतनें अपने पति के प्रति वफादार रहती हैं, लेकिन उनके बीच का रिश्ता भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। सगी बहनों की तरह वे एक-दूसरे के साथ संबंध स्थापित करती हैं। यह संबंध केवल सहनशीलता का नहीं, बल्कि सहयोग और विश्वास का भी होता है।

सौतनों के बीच का बंधन परिवार में अन्य सभी सदस्यों को प्रभावित करता है। जब पति 2 शादियां करता है, तो सौतनें एक-दूसरे के घरों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह स्थिति केवल प्रतिस्पर्धा का निर्माण नहीं करती, बल्कि वे एक-दूसरे की भावनाओं को समझने और एक-दूसरे की मदद करने की कोशिश भी करती हैं। इन रिश्तों में अक्सर सम्मान और समझ का भाव होता है, जो उन्हें एक-दूसरे के प्रति और अधिक घनिष्ठ बनाता है।

इस तरह के संबंधों में आमतौर पर पारिवारिक जिम्मेदारियां साझा की जाती हैं। जब बच्चे होते हैं, तो दोनों सौतनें बच्चों की परवरिश में एक-दूसरे की सहायता करती हैं। इस प्रक्रिया में, वे एक-दूसरे के अधिकारों और सीमाओं का सत्कार करती हैं और सौतन के बीच की भलाई को प्राथमिकता देती हैं। इस प्रकार, सौतनें केवल सहधर्मी नहीं होतीं, बल्कि उनका रिश्ता बहुत मजबूत और सहायक बनता है।

अंततः, शादि की इस विविधता को समझने में यह आवश्यक है कि हम सौतन के बीच विश्वास और सहयोग की भावना को पहचानें। इस तरह का संबंध समय के साथ विकसित होता है और एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखने पर आधारित होता है।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

भारत के इस गाँव में जहां 2 शादियां एक आम परंपरा हैं, इसका सामाजिक और आर्थिक प्रभाव गहराई से महसूस किया जाता है। सबसे पहले, जब एक पुरुष दो पत्नियों को अपना लेता है, तो इन पत्नियों के बीच सामाजिक संबंध और प्रतिस्पर्धा विकसित होती है। सौतनें, जो कि आपस में सगी बहनों की तरह रहती हैं, अपने अधिकारों और स्थान के लिए एक दूसरे के साथ संतुलन बनाने की कोशिश करती हैं। यह सहिष्णुता कभी-कभी तनावपूर्ण भी हो सकती है, जिसे परिवार सुलझाने की कोशिश करता है।

आर्थिक दृष्टिकोण से, इस प्रथा का संपत्ति के बंटवारे पर गहरा असर पड़ता है। संपत्ति को सुरक्षित करने और परिवार के माध्यम से इसे बढ़ाने के लिए, पुरुष अपने दो विवाहों के माध्यम से पैतृक संपत्ति का प्रबंधन करते हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया में अनेक जटिलताएँ उत्पन्न होती हैं, जैसे संपत्ति का विभाजन और संतान के अधिकार। बच्चों की परवरिश भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। प्रत्येक पत्नी अपने बच्चों को अपनी पहचान देने और संसाधनों का विस्तार करने की कोशिश करती है, जिसके कारण कभी-कभी सामूहिक देखभाल की चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं।

इसके अतिरिक्त, विवाह से जुड़ी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है। दो शादियों की जिम्मेदारियाँ, एक पुरुष के लिए बेशुमार तनाव का कारण बन सकती हैं। पारिवारिक संरचना में विभिन्न मतभेदों और संघर्षों को सुलझाना आवश्यक हो जाता है। अंतिम रूप से, यह प्रथा केवल व्यक्तिगत परिवारों को नहीं, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करती है, जिससे सामूहिक मानसिकता और सामाजिक स्थिरता पर असर पड़ता है।

आधुनिकता और परंपरा का संगम

भारत में शादी की परंपरा एक गहरे सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर का प्रतिनिधित्व करती है। हाल के वर्षों में आधुनिकता ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में युवक एवं युवतियों के दृष्टिकोण को प्रभावित किया है। वर्तमान में इस गांव के युवा अब इस प्रथा से दूर होते जा रहे हैं। नई पीढ़ी इसे उतना महत्व नहीं दे रही जितना उनके पूर्वज देते थे। आधुनिकता का प्रभाव इन ग्रामीणों पर भी पड़ रहा है, और वे समय के साथ चलने की कोशिश कर रहे हैं।

गांव के युवा अब साक्षरता और सूचना के व्यापक स्रोतों तक पहुंच के कारण अलग दृष्टिकोण से परंपराओं को देखते हैं। कई युवा पीढ़ी के लोग 2 शादियों की प्रथा को नकारने या संशोधित करने के पक्षधर हैं, क्योंकि वे मानते हैं कि आधुनिकता के दौर में विवाह की परिभाषा बदल रही है। आजकल प्यार, समानता और सम्मान पर जोर देने वाली वैवाहिक संबंधों की अवधारणा उजागर हो रही है। इसलिए, यह अपेक्षित है कि भविष्य में यह प्रथा किस प्रकार विकसित होगी।

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