नई दिल्ली। भारत में डिजिटल पेमेंट क्रांति ने एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। मार्च 2025 में UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के माध्यम से 24.77 लाख करोड़ रुपये के लेन-देन किए गए, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह लगातार 11वां महीना रहा जब UPI ट्रांजैक्शंस का कुल मूल्य 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक बना रहा।
UPI की बढ़ती लोकप्रियता
सालाना तुलना: मार्च 2024 की तुलना में इस साल 25% की वृद्धि हुई है।
वॉल्यूम ग्रोथ: लेन-देन की संख्या में 36% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मार्च में कुल ट्रांजैक्शंस: 18.3 बिलियन (यानी 1830 करोड़ ट्रांजैक्शंस)।
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तिमाही प्रदर्शन भी शानदार
जनवरी से मार्च 2025 के दौरान UPI ट्रांजैक्शंस की कुल वैल्यू 70.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी अवधि से 24% ज्यादा है।
दैनिक औसत लेन-देन: ₹79,903 करोड़, जो फरवरी से 1.9% अधिक रहा।
UPI ट्रांजैक्शंस की संख्या: 2.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
प्रति ट्रांजैक्शन औसत मूल्य: ₹1,353.6, जो दर्शाता है कि लोग अब छोटे लेकिन अधिक फ्रीक्वेंट ट्रांजैक्शंस कर रहे हैं।
क्या UPI की यह बढ़त जारी रहेगी?
UPI की सफलता को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत जल्द ही डिजिटल पेमेंट्स के मामले में नया वैश्विक बेंचमार्क सेट कर सकता है। सरकार, NPCI और फिनटेक कंपनियों की लगातार कोशिशों से आने वाले महीनों में यह आंकड़ा और भी ऊंचाई छू सकता है।
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