गडचिरोली में 82 लाख के 11इनामी माओवादी DGP के समक्ष आत्मसमर्पित

गडचिरोली में 82 लाख के 11इनामी माओवादी DGP के समक्ष आत्मसमर्पित

गडचिरोली :- महाराष्ट्र के नक्सल उन्मूलन अभियान को आज एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला के समक्ष 2 DVCM, 3 PPCM, 2 ACM और 4 सदस्य पद के कुल 11 कुख्यात माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इन पर महाराष्ट्र सरकार द्वारा कुल 82 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें से 4 माओवादी यूनिफॉर्म और हथियारों सहित सरेंडर हुए। यह आत्मसमर्पण सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि गडचिरोली और दंडकारण्य के माओवादी नेटवर्क पर सबसे बड़े प्रहारों में से एक है।

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अब तक 112 माओवादी आत्मसमर्पित

गडचिरोली पुलिस और CRPF की संयुक्त रणनीति ने इस वर्ष माओवादियों की कमर तोड़ दी है। 2022 से अब तक 146, जबकि सिर्फ 2025 में 112 माओवादी हथियार डाल चुके हैं। यह आँकड़ा संकेत देता है कि माओवादी संगठन का प्रभाव और जनाधार तेजी से ढह रहा है। दो दिवसीय दौरे पर गडचिरोली पहुंचीं DGP रश्मि शुक्ला और ADGP (ऑप्स) डॉ. छेरिंग दोरजे के सामने इन 11 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। सरकार की कोमल पुनर्वसन नीति और पुलिस की कड़ी रणनीति ने मिलकर यह बड़ा बदलाव लाया है।

सरेंडर करने वालों में टॉप कमांडर

सरेंडर करने वालों में कई कुख्यात चेहरे शामिल हैं, जिनमें रमेश उर्फ ​​भीमा गुड्डी लेकामी (DVCM, 88 केस दर्ज), भीमा उर्फ ​​सीटू हिडमा कोवासी (DVCM, बटालियन-01 के पूर्व डिप्टी कमांडर), लकी अदामा गोटा (PPCM, सेक्शन कमांडर PLGA बटालियन-1) और रतन ओयाम, कमला वेलाडी, और दूसरे अनुभवी कैडर शामिल हैं। इनमें से कई के खिलाफ मर्डर, पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन पर हमले, IED ब्लास्ट, जलाए गए कैंप, एक्सटॉर्शन और 40 से ज़्यादा एनकाउंटर के केस दर्ज थे।

आत्मसमर्पण के बाद मिलेगा बड़ा पुनर्वसन पैकेज

केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से सरेंडर के बाद बड़े माओवादियों को 8.5 लाख रुपये तक, दूसरों को 4.5 से 5 लाख रुपये, पति-पत्नी के साथ सरेंडर करने पर 1.5 लाख रुपये एक्स्ट्रा और ग्रुप में सरेंडर करने पर 10 लाख रुपये दिए जाते हैं। यह पॉलिसी हज़ारों युवाओं को हिंसा छोड़कर मेनस्ट्रीम में लौटने के लिए इंस्पायर कर रही है।

C-60 और विशेष अभियान पथक का सम्मान

एकलव्य हॉल में आयोजित समारोह में DGP ने C-60 कमांडो, स्पेशल ऑपरेशन टीम और CRPF अधिकारियों को सम्मानित किया। मल्लोजुला वेनुगोपाल राव उर्फ भूपति, जो पोलित ब्यूरो सदस्य और शीर्ष कमांडर था, उसके आत्मसमर्पण को अभियान की सबसे बड़ी जीत बताया गया।

DGP रश्मि शुक्ला ने माओवादियों को शांति और विकास की मुख्यधारा में आने का आवाहन (Top Maoist Surrenders) किया। उन्होंने कहा, हिंसा कभी समाधान नहीं। गडचिरोली तेजी से बदल रहा है, युवा हथियार नहीं, शिक्षा और रोजगार को अपना रहे हैं।

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