सरकार ने घटाया GST, जानिए किन लोगो को मिलेगा फायदा

सरकार ने घटाया GST, जानिए किन लोगो को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली: इंश्योरेंस प्रीमियम से जीएसटी हटने का फायदा पॉलिसीहोल्डर को निश्चित रूप से मिलेगा। बाकी चीजों पर भी घटी हुई दरों का फायदा लोगों को मिले, यह सुनिश्चित किया जाएगा। सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) के चेयरमैन संजय कुमार अग्रवाल ने नवभारत टाइम्स को दिए विशेष साक्षात्कार में कुछ बातें कही।

सवाल: लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी 22 सितंबर से खत्म हो जाएगा। क्या पॉलिसीधारक को फायदा मिल पाएगा?
जवाब: इसको एक उदाहरण से देखिए। मान लेते हैं कि 10000 रुपये का प्रीमियम है। अभी उस पर 18% जीएसटी के चलते पॉलिसीहोल्डर को 11800 रुपये पेमेंट करना था। जीएसटी जीरो होने पर 1800 रुपये हट गए। लेकिन कंपनी इसमें ऑफिस खर्च और एजेंट कमीशन सहित जिस भी इनपुट का उपयोग करती थी, उस पर टैक्स अब भी 18% ही है। अभी इसका कुछ हिस्सा वह इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से एडजस्ट करती है और कुछ हमें कैश पेमेंट करती है। अब उसको आईटीसी नहीं मिलेगा। एग्जेम्पशन जीरो हो गया। अगर आईटीसी 800-900 रुपये हो और कंपनी इसे प्रीमियम में जोड़ दे, तो भी पॉलिसीहोल्डर को कुल 10900 रुपये ही देने हैं। यह 11500 रुपये से कम ही है। ऐसा नहीं होगा कि जीएसटी जीरो हो गया, फिर भी पॉलिसीधारक को 11800 रुपये चुकाने पड़ें। जीएसटी खत्म होने का फायदा मिलना तय है।

सवाल: बाकी चीजों में रेट कट का फायदा लोगों को मिले, यह कैसे पक्का होगा?
जवाब: ये सारी चीजें बहुत कॉम्पिटीटिव है। जो रेट घटाया गया है, कोई भी इंडस्ट्री ऐसा नहीं है कि इसे अपनी जेब में रख सकेगी। रेट घटने की जानकारी शिकायतें आएंगी तो कंपनियों से बात की जाएगी। सिस्टम में अभी एमआरपी वाला जो माल है, अगर उस चीज पर अब कम रेट लागू होना है, तो 22 सितंबर के बाद घटा जीएसटी ही चार्ज होगा।

सवाल: ऑटोमोबाइल डीलर्स के पास जो स्टॉक है, उस पर चुकाए गए कंपनसेशन सेस का क्या होगा?
जवाब: ऑटोमोबाइल्स हों या एयरेटेड ड्रिंक्स, इनके मौजूदा स्टॉक पर चुकाए गए कंपनसेशन सेस का रिफंड 21 सितंबर के बाद नहीं मिलेगा। इस सेस का उपयोग नहीं हो पाएगा। कई चीजें ऐसी है, जिन पर 22 सितंबर से टैक्स घटेगा। इनके स्टॉक पर चुकाया जा चुका अतिरिक्त टैक्स 22 सितंबर के बाद आईटीसी के रूप में उपयोग किया जा सकेगा।

सवाल: अभी सिगरेट, पान मसाला पर 28% जीएसटी और सेस लगाने के साथ कुल टैक्स 60% या इससे भी ज्यादा हो जाता है। जब इन पर केवल 40% टैक्स लगेगा, तब रेवेन्यू घटेगा। इसे कैसे मैनेज करेंगे?
जवाब: राज्यों को कंपनसेशन सेस से जुड़े पेमेंट के लिए ने लोन लिया गया था, उसका पेमेंट हो जाने पर इन चीजों पर 40% टैक्स लगेगा। जीएसटी के तहत 40% से ज्यादा रेट नहीं रख सकते, लेकिन अभी इन चीजों पर जितना कुल टैक्स बनता है, उसे मेंटेन करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

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सवाल: क्या अमेरिकी टैरिफ से जीडीपी ग्रोथ पर पड़ने वाला असर क्या जीएसटी रेट घटने से खत्म हो जाएगा?
जवाब: पिछला अनुभव यही है कि जब भी रेट कम हुए है, चीजों की खपत बढ़ती है। लोगों की जेब में पैसे बचेंगे तो वे कहीं न कहीं खर्च करेंगे। इस पर जीएसटी भी कलेक्ट होगा। इससे इकनॉमिक ग्रोथ भी होगी, लेकिन अभी यह अनुमान लगना मुश्किल है कि कितनी बढ़ेगी। हम किसी खास चीन से लिंक नहीं कर सकते कि उपभोक्ता किस चीज पर खर्च बढ़ाएगा।

सवाल: आईटीसी फ्रॉड पर कैसे कंट्रोल करेंगे?
जवाब: ऐसी शिकायत तब आती है, जब इकाइयां इस तरह क्रिएट की जाती है, जिनका मकसद जीएसटी चुकाने के बजाय सिस्टम में फर्जी आईटीसी जेनरेट करना होता है। ये पहले रिटर्न में बहुत इनवॉयसेज दिखाते हैं कि इतनी सप्लाई की और फिर वह आईटीसी पास ऑन हो गया। उसके बाद वे गायब हो जाते हैं। लिहाजा हमें पूरी चेकिंग के बाद रजिस्ट्रेशन करना है। ऐसा भी होता है कि रजिस्ट्रेशन के बाद कोई फ्रॉड करके निकल गया। इस पर हमारा काम चल रहा है। प्री-फिल्ड फॉर्म में जो एडिट कर देते हैं, उस पर अभी हमने नए इंस्ट्रूमेंट्स प्रोवाइड कर दिए है। आउटपुट साइट में इसे GSTR-1A कहते है और इनपुट साइड में इनवॉयस मैनेजमेंट सिस्टम शुरू किया है। इसमें अभी कुछ इश्यूज है, जैसे ही ये ठीक हो जाएंगे, प्री-फिल्ड फॉर्म को एडिट नहीं किया जा सकेगा। फेक आईटीसी की प्रॉब्लम खत्म हो जाएगी।

सवाल: ये कदम इतनी देर में क्यों उठाया गया ?
जवाब: जीएसटी को 8 साल हो गए थे। सिस्टम स्टेबल हो गया था। रेवेन्यू ग्रोथ अच्छी है। तो सरकार के पास कॉन्फिडेंस आया कि हम यह काम कर सकते हैं। पहले जब जीएसटी रेट तय किए गए थे, तब रेवेन्यू न्यूट्रलिटी का मेन क्राइटेरिया था। जैसे कि सीमेंट न तो लग्जरी गुड्स है और न ही सिन गुड्स, लेकिन इस पर रेवेन्यू न्यूट्रल रेट 28% था, तो वही रख दिया गया। लेकिन अब यह देखा गया है कि कौन सा आइटम किस रेट पर रहना चाहिए, स्टैंडर्ड रेट पर रहे या मेरिट रेट पर। सीमेंट मेरिट रेट पर नहीं हो सकता क्योंकि यह रोजमर्रा के उपयोग की चीज नहीं है। इसलिए 18% टैक्स लगाया गया है। यह रेट रिस्ट्रक्चरिंग हुई है। दो रेट बनाए, जिससे क्लासिफिकेशन के मसले भी खत्म हो।

सवाल: क्या इसके बाद सिंगल जीएसटी रेट की बारी है?
जवाब: वैसे आइडियली तो एक ही जीएसटी का रेट होना चाहिए लेकिन अभी हमारी इकॉनमी ऐसी स्थिति में नहीं है कि कार से लेकर खाने-पीने की चीजों तक पर एक ही रेट लगा दें। फिलहाल हम दो जीएसटी रेट वाले स्ट्रक्चर तक आ गए हैं।

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