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शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्था “युवा” द्वारा गुरु पूर्णिमा उत्सव का आयोजन

रायपुर :- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्था “युवा” ने अपने संडे स्पेशल क्लास के क्रम में आज गुरु पूर्णिमा उत्सव का भव्य आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को उजागर करना और समाज में शिक्षा, संस्कृति, और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता फैलाना था। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री मदन चौहान ‘गुरु जी, जो एक प्रसिद्ध भजन गायक हैं, ने अपनी गरिमामय उपस्थिति से कार्यक्रम को और अधिक विशेष बनाया।

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संस्था के संस्थापक एम. राजीव ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, और श्रोताओं का स्वागत किया। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने गुरु पूर्णिमा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह दिन गुरु के प्रति कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का एक विशेष अवसर है। उन्होंने बताया कि “युवा” संस्था का उद्देश्य न केवल शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देना है, बल्कि समाज में नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भी बढ़ावा देना है।

पद्मश्री मदन चौहान ‘गुरु जी’ ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में गुरु के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा, *”गुरु बिना ज्ञान नहीं होता।”* गुरु ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर के समान हैं, जैसा कि शास्त्रों में उल्लेखित है: *”गुरुर ब्रह्मा, गुरुर विष्णु, गुरुर देवो महेश्वरः।”* गुरु वह मार्गदर्शक है जो न केवल ज्ञान देता है, बल्कि जीवन को सही दिशा प्रदान करता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि गुरु हमेशा अपने शिष्यों के लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा देते हैं। छोटे लक्ष्यों तक सीमित रहने के बजाय, शिष्यों को अपने गुरु के मार्गदर्शन में ऊंचाइयों को छूने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “आज जो कुछ भी हम हैं, वह गुरु की कृपा और आशीर्वाद के कारण ही है।”* गुरु से प्राप्त ऊर्जा और आशीर्वाद जीवन में प्रेरणा का स्रोत बनते हैं। गुरु से न केवल ज्ञान लेना चाहिए, बल्कि हमेशा सुनने और सीखने की भावना को जीवित रखना चाहिए। उनके शब्दों ने सभी श्रोताओं के मन को गहराई से छुआ और उपस्थित लोगों में उत्साह का संचार किया।

कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण रहा *पद्मश्री मदन चौहान ‘गुरु जी’* द्वारा प्रस्तुत कबीर और मीरा के भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी। उनके द्वारा गाए गए भजनों में कबीर का गायन और मीरा का भक्ति भजन शामिल थे, जो अत्यंत मधुर और हृदयस्पर्शी थे। इन प्रस्तुतियों ने सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके गायन की गहराई और भावनाओं ने दर्शकों का दिल जीत लिया, और पूरे सभागार में खूब वाहवाही हुई। इन भजनों ने गुरु-शिष्य परंपरा और भक्ति की भावना को जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने शिक्षक के महत्व पर अपने विचार साझा किए। श्री बी सी अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया कि गुरु न केवल ज्ञान का स्रोत हैं, बल्कि वे जीवन में नैतिकता, अनुशासन और आत्मविश्वास का निर्माण करते हैं। श्री सी के साहू ने कहा, *”गुरु वह दीपक है जो अंधेरे में हमें राह दिखाता है।”* इस दौरान कई प्रेरक कहानियों और अनुभवों का आदान-प्रदान हुआ, जो युवाओं के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायी थे।

कार्यक्रम के अंत में *श्री द्रोहित शिवहरे* ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों, विशेष रूप से मुख्य अतिथि पद्मश्री मदन चौहान ‘गुरु जी’, संस्था के सदस्यों, और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और गुरु-शिष्य परंपरा को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

गुरु पूर्णिमा उत्सव रायपुर की शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्था “युवा” के लिए एक यादगार आयोजन रहा। पद्मश्री मदन चौहान ‘गुरु जी’ की उपस्थिति, उनके भजनों, और प्रेरक संबोधन ने कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया। सभी श्रोताओं ने इस आयोजन से प्रेरणा और ऊर्जा प्राप्त की। “युवा” संस्था भविष्य में भी इस तरह के आयोजनों के माध्यम से समाज में शिक्षा और संस्कृति के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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