महिला आयोग में कार्यरत निज सहायक ने 3 सदस्यों पर लगाए गंभीर आरोप…!

महिला आयोग में कार्यरत निज सहायक ने 3 सदस्यों पर लगाए गंभीर आरोप…!

रायपुर :- छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग में कार्यरत अध्यक्ष के निज सहायक ने आयोग की तीन सदस्याओं लक्ष्मी वर्मा, सरला कोसरिया और दीपिका शोरी पर झूठे आरोप लगाकर फंसाने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने आयोग को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

आरोपों की प्रमुख बिंदु

शिकायतकर्ता के अनुसार, आयोग की सदस्यों द्वारा उन्हें मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण आरोपों में फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन पर नरीगांव, जिला बेमेतरा की दो महिलाओं से 25,000 रुपये लेने और प्रकरणों में दादागिरी कर सुनवाई प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है, जिसे उन्होंने पूरी तरह झूठा और बेबुनियाद बताया।

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सदस्यों द्वारा उन्हें बार-बार डराया-धमकाया गया और कहा गया कि वे यदि अध्यक्ष के खिलाफ काम नहीं करेंगे तो झूठे मामलों में फंसा दिया जाएगा। एक पूर्व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी राघवेन्द्र साहू पर आरोप लगाया गया है कि उसने फर्जी हस्ताक्षर कर RTI आवेदन प्रस्तुत किया और आवेदिकाओं के नाम से फर्जी दस्तावेज निकाले, जो बाद में मीडिया में वायरल हुए।

फर्जीवाड़े के आरोप

शिकायत में कहा गया है कि, जिन महिलाओं के नाम से पैसे लेने का आरोप लगाया गया है, उन्होंने स्वयं लिखित में स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई शिकायत नहीं की है और न ही पैसे दिए हैं। RTI आवेदन में महिलाओं के फर्जी हस्ताक्षर कर पूर्व कर्मचारी राघवेन्द्र साहू ने दस्तावेज निकाले, जिसकी पुष्टि उनके हस्ताक्षर से स्टांप पेपर पर होती है। इस संबंध में संबंधित महिलाएं शपथ पत्र के साथ फर्जीवाड़े की शिकायत भी दर्ज करा चुकी हैं।

पक्षपात और राजनीतिक दबाव का आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि तीनों सदस्या, आयोग में भाजपा से जुड़े मामलों को दबाने का प्रयास करती हैं। पीड़ित महिलाओं के मामलों में यदि आरोप भाजपा नेताओं पर हों, तो उन्हें नजरअंदाज किया जाता है। कुछ मामलों में महिला आयोग के निर्णयों पर राजनीतिक हस्तक्षेप हुआ है। आयोग के पूर्व सचिव और वर्तमान कर्मचारियों को भी धमकाया गया है।

निष्पक्ष जांच की मांग

शिकायत में मांग की गई है कि, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच (Mahila Aayog) कराई जाए और आयोग के वातावरण को राजनीति से मुक्त रखा जाए ताकि पीड़ित महिलाओं को न्याय मिल सके और कर्मचारी भयमुक्त होकर कार्य कर सकें।

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