नई दिल्ली :- डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर भारत सरकार और मेटा के बीच चल रहा विवाद अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM), डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म संचालन में सामने आई गंभीर कमियों को लेकर मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से माफी व्यक्त की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में कार्यरत सभी डिजिटल कंपनियों को देश के कानूनों और नियमों का पूर्ण पालन करना होगा।
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सूत्रों के मुताबिक, संसदीय समिति ने मेटा को तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने और अपनी जवाबदेही स्पष्ट करने के निर्देश दिए थे। समिति ने यह भी संकेत दिया था कि निर्देशों की अनदेखी की स्थिति में कंपनी को सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा (सेफ हार्बर) पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
पीएम के वीडियो हटने से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हट गया। वीडियो में नीट पेपर लीक जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था का उल्लेख था। बाद में मेटा ने इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए वीडियो पुनः बहाल किया और खेद भी व्यक्त किया, लेकिन सरकार ने पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी।
आईटी मंत्रालय ने बुलाई उच्चस्तरीय बैठक
मामले की गंभीरता को देखते हुए आईटी मंत्रालय ने मेटा की ग्लोबल टीम को दिल्ली तलब किया। आईटी सचिव एस. कृष्णन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कंटेंट मॉडरेशन, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, डीपफेक पर नियंत्रण और प्लेटफॉर्म की नीतियों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों से पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा दोहराई।
एफआईआर और अन्य मुद्दों पर भी चर्चा
जांच के दौरान प्रधानमंत्री से जुड़े कथित मॉर्फ्ड और एआई-जनरेटेड कंटेंट के मामले में दर्ज एफआईआर सहित कई विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में व्हाट्सएप की नई यूजरनेम नीति, इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक सामग्री की निगरानी और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े उपायों पर भी सवाल उठाए गए।
भारत मेटा का सबसे बड़ा डिजिटल बाजार
भारत मेटा के लिए सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार माना जाता है। देश में करोड़ों लोग व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और फेसबुक का उपयोग करते हैं। ऐसे में सरकार का कहना है कि उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा, डेटा संरक्षण और आपत्तिजनक सामग्री पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना प्रत्येक डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कानूनों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम आगे भी जारी रहेंगे।
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