वेब-डेस्क :- फाइनेंशियल ईयर के अंत मार्च 2025 में खुदरा निवेशकों ने छह महीनों में पहली बार इक्विटी में शुद्ध बिकवाली दर्ज की, जिससे 10,500 करोड़ रुपये की निकासी हुई। यह सितंबर 2024 के बाद पहली बार था जब खुदरा निवेशकों ने इतनी तेज बिकवाली की। इस बीच, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 28,118 करोड़ रुपये का निवेश किया, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 8,224 करोड़ रुपये की बिकवाली जारी रखी।
बिकवाली के कारण:
1. वित्तीय वर्ष का अंत: मार्च के अंत में कर-बचत और अन्य वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए खुदरा निवेशकों ने लाभ और हानि की परवाह किए बिना इक्विटी होल्डिंग्स को समाप्त किया।
2. एफआईआई की बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा निरंतर बिकवाली ने खुदरा निवेशकों को सतर्क कर दिया, जिससे उन्होंने
बाजार से बाहर निकलना बेहतर समझा।
3. अस्थिरता और सुधार: सितंबर 2024 से जारी बाजार सुधार और खासकर स्मॉल और मिड-कैप (SMID) शेयरों में गिरावट ने नए निवेशकों को अस्थिर कर दिया।
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घरेलू संस्थागत निवेशकों की रणनीति:
DII ने बाजार में भरोसा जताते हुए 28,118 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिससे बाजार में स्थिरता बनाए रखने का प्रयास किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के लिए भारतीय बाजार में सकारात्मक दृष्टिकोण बरकरार है।
भविष्य की संभावनाएं:
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में बाजार में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन छोटे और मध्यम निवेशकों को सतर्कता बरतनी होगी।
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