राज्य की आखिरी कैबिनेट बैठक में पुलिस कमिश्नर प्रणाली पर फैसला संभव…!

राज्य की आखिरी कैबिनेट बैठक में पुलिस कमिश्नर प्रणाली पर फैसला संभव…!

रायपुर :- छत्तीसगढ़ की इस साल की आखिरी कैबिनेट मीटिंग 31 दिसंबर को होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में यह मीटिंग सुबह 11 बजे मंत्रालय में होगी। इस बैठक में धान खरीदी, पुलिस कमिश्नर प्रणाली और स्वास्थ्य-चिकित्सा से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। राज्य सरकार की यह बैठक साल के आखिरी दिन होने के कारण महत्वपूर्ण मानी जा रही है, और विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत फैसले लेने की संभावना है।

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क्या है पुलिस कमिश्नर प्रणाली

पुलिस कमिश्नर प्रणाली (Police Commissioner System) भारत में पुलिस प्रशासन का एक विशेष प्रकार का ढांचा है, जिसे आम तौर पर बड़े शहरों और शहरी क्षेत्रों में लागू किया जाता है। इसे समझने के लिए इसे दो हिस्सों में बांटना आसान है: संरचना और कार्यप्रणाली।

इस प्रणाली में शहर की पुलिस का नेतृत्व पुलिस कमिश्नर (Commissioner of Police) करता है। पुलिस कमिश्नर को अधिकार और जिम्मेदारी दोनों मिलते हैं, जो पारंपरिक जिला पुलिस+जिला मजिस्ट्रेट मॉडल से अलग है। कमिश्नर आमतौर पर आईपीएस अधिकारी होते हैं और उनके अधीन विभिन्न विभाग होते हैं जैसे अपराध (Crime), ट्रैफिक, कानून-व्यवस्था आदि।

मुख्य अंतर

पारंपरिक प्रणाली में कानून-व्यवस्था बनाए रखना जिला मजिस्ट्रेट का काम होता है और पुलिस केवल सहायता करती है। कमिश्नर प्रणाली में पुलिस कमिश्नर के पास कानून-व्यवस्था बनाए रखने का शक्तिशाली अधिकार होता है, जैसे गिरफ्तारी करना, तलाशी आदेश देना आदि।

कार्यप्रणाली

शहर में कानून और शांति बनाए रखना पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी होती है। वह अपराधियों की गिरफ्तारी, हिंसा या दंगे रोकने, सुरक्षा बनाए रखने और शहरी अपराध पर नजर रखने के लिए कदम उठाते हैं। कमिश्नर सीधे राज्य सरकार के गृह विभाग को रिपोर्ट करते हैं। इसके अंतर्गत विभिन्न विशेष इकाइयां भी होती हैं, जैसे साइबर क्राइम, ट्रैफिक, एंटी-टेररिस्ट आदि।

पारंपरिक मॉडल से लाभ

फैसले तेज़ और असरदार होते हैं। पुलिस सीधे कार्रवाई कर सकती है। जिला मजिस्ट्रेट पर निर्भरता कम: पुलिस को प्रशासनिक आदेशों के लिए प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती। बड़े शहरों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना आसान होता है।

कहां लागू होता है

भारत के बड़े शहर जैसे मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता आदि। छोटे शहरों या ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी पारंपरिक मॉडल अधिक(Police Commissioner System) प्रचलित है।

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