CJP के आशुतोष रांका और सौरव दास ने जेल से बाहर आने के बाद साझा किया तिहाड़ जेल का अनुभव

CJP के आशुतोष रांका और सौरव दास ने जेल से बाहर आने के बाद साझा किया तिहाड़ जेल का अनुभव

नई दिल्ली: नागरिक अधिकार संगठन ‘सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) के सदस्य आशुतोष रांका और सौरव दास के जेल से रिहा होने के बाद, तिहाड़ जेल के अंदर के उनके अनुभवों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रिहाई के बाद दोनों कार्यकर्ताओं ने खुलकर बात की और सलाखों के पीछे बिताए गए वक्त, वहां की व्यवस्था और अपने सफर के दौरान आई चुनौतियों के बारे में अपने विचार साझा किए।

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तिहाड़ के भीतर का संघर्ष और अनुभव

आशुतोष रांका और सौरव दास ने बताया कि जेल के अंदर का जीवन बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग और मानसिक रूप से एक कठिन परीक्षा की तरह होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे इस पूरी प्रक्रिया ने उन्हें न्याय और मानवाधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर और अधिक दृढ़ता से सोचने का अवसर दिया।

मानसिक मजबूती : कठिन परिस्थितियों और अनिश्चितता के बावजूद, दोनों ने अपनी वैचारिक स्पष्टता और मानसिक संतुलन को बनाए रखा।

सामूहिक एकजुटता : जेल के अंदर मिले अनुभवों ने उन्हें यह अहसास कराया कि नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वालों को किस प्रकार के दमन और प्रशासनिक दबावों का सामना करना पड़ता है ,

समर्थन और आगे की राह

रिहाई की खबर सामने आते ही मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों और शुभचिंतकों ने राहत की सांस ली। CJP के इन सदस्यों की रिहाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के संघर्ष में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।

आशुतोष रांका और सौरव दास ने स्पष्ट किया है कि तिहाड़ जेल में बिताए गए इन दिनों ने उनके हौसलों को कमजोर करने के बजाय न्याय के पक्ष में उनकी आवाज को और अधिक बुलंद किया है। वे आने वाले दिनों में जनता के बीच अपने अनुभवों को साझा करने और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी मुहिम को जारी रखने के लिए तैयार हैं।

 

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