**जगन्नाथ रथयात्रा: आस्था, भक्ति और समर्पण का ऐतिहासिक महापर्व**

**जगन्नाथ रथयात्रा: आस्था, भक्ति और समर्पण का ऐतिहासिक महापर्व**

नेशनल डेस्क :- आज का दिन भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि आज ओडिशा के पवित्र शहर पुरी में विश्व प्रसिद्ध **’जगन्नाथ रथयात्रा’** का भव्य आयोजन हो रहा है। यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, प्रेम और भगवान के प्रति उनके अटूट विश्वास का प्रतीक है।

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हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकलने वाली इस रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ (श्री कृष्ण), उनके बड़े भाई बलभद्र (बलराम) और बहन सुभद्रा अपने भव्य रथों में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं। आइए जानते हैं इस अलौकिक यात्रा से जुड़ी कहानी और इसका महत्व।

 **क्या है रथयात्रा की कहानी? (पौराणिक मान्यता)**

रथयात्रा को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, लेकिन सबसे प्रमुख मान्यता भगवान जगन्नाथ के अपनी मौसी के घर जाने से जुड़ी है।

कथा के अनुसार, एक बार बहन सुभद्रा ने अपने भाइयों— भगवान कृष्ण (जगन्नाथ) और बलराम से द्वारका दर्शन करने की इच्छा प्रकट की। अपनी बहन की इस इच्छा को पूरा करने के लिए दोनों भाई उन्हें रथ में बिठाकर नगर भ्रमण के लिए निकले। इसी परंपरा को याद करते हुए हर साल पुरी में रथयात्रा निकाली जाती है।

इस यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी अपने मुख्य मंदिर से निकलकर **गुंडिचा मंदिर** जाते हैं। गुंडिचा माता को भगवान जगन्नाथ की मौसी माना जाता है। यहाँ तीनों भाई-बहन नौ दिनों तक विश्राम करते हैं और फिर वापस अपने मुख्य मंदिर लौट आते हैं, जिसे ‘बहुड़ा यात्रा’ कहा जाता है।

**तीन भव्य रथों की अद्भुत विशेषताएं**

इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण वे तीन विशाल रथ होते हैं, जिन्हें हर साल लकड़ी से नया बनाया जाता है। इन रथों के निर्माण में एक भी कील का इस्तेमाल नहीं होता।

* **नंदीघोष (भगवान जगन्नाथ का रथ):** यह सबसे बड़ा रथ होता है, जिसमें 16 पहिए होते हैं। लाल और पीले रंग के इस रथ की ऊंचाई लगभग 45 फीट होती है।
* **तालध्वज (भगवान बलभद्र का रथ):** यह रथ भगवान जगन्नाथ के रथ से थोड़ा छोटा होता है। इसमें 14 पहिए होते हैं और इसका रंग लाल और हरा होता है।
* **दर्पदलन (देवी सुभद्रा का रथ):** देवी सुभद्रा का रथ लाल और काले रंग का होता है, जिसमें 12 पहिए लगे होते हैं।

 **रथयात्रा का सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व**

जगन्नाथ रथयात्रा दुनिया का एकमात्र ऐसा त्योहार है जहाँ भगवान स्वयं अपने गर्भ गृह से बाहर निकलकर अपने भक्तों को दर्शन देने आते हैं। यह यात्रा समानता का सबसे बड़ा संदेश देती है। इस दिन राजा से लेकर रंक तक, सभी एक समान होते हैं। पुरी के गजपति महाराज (राजा) स्वयं सोने की झाड़ू से रथ का रास्ता साफ करते हैं, जिसे ‘छैरा पहरा’ (Chera Pahara) रस्म कहा जाता है।

रथ की रस्सियों को खींचना जीवन के सभी पापों से मुक्ति पाने और मोक्ष प्राप्ति का साधन माना जाता है। यही कारण है कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस दिन बस एक बार रथ की रस्सी छूने की लालसा लिए पुरी पहुंचते हैं।

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