हल्बी भाषा-शास्त्र में डॉ अखिलेश को PH.D.

जगदलपुर :- 5 मार्च को शहीद महेंद्र कर्मा शासकीय विश्वविद्यालय जगदलपुर में होने वाले दीक्षांत समारोह में माननीय गवर्नर महोदय तथा माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की वर्चुअल उपस्थिति में अन्य शोधार्थियों के साथ डॉक्टर अखिलेश त्रिपाठी को भी “हल्बी भाषा-शास्त्र” पर उनके शोध हेतु PH.D. की उपाधि प्रदान की जाएगी।

इस अवसर पर अपनी शोध यात्रा के अनुभवों साझा करते हुए डॉ अखिलेश ने कहा कि हल्बी पर शोध करना बड़ा कठिन एवं दुष्कर कार्य था। दरअसल इस विषय पर इससे पूर्व कोई शोध कार्य नहीं किया गया था इसलिए रेफरेंसेसका अकाल था।

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सम्पूर्ण क्षेत्र की संपर्क बोली के रूप में विद्यमान रही है। परन्तु यह दुर्भाग्य ही है कि विभिन्न कारणों से यह अन्यान्य बोली भाषाओं से प्रभावित हो रही है। इस प्रक्रिया में वर्तमान समय में इसका रूप विकृत हो रहा है। यदि हल्बी बोली के संरक्षण, संवर्धन की ओर शासन-प्रशासन, शैक्षणिक संस्थानों एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा प्राथमिकता के आधार पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह बोली भी उसी प्रकार खतरे में पड़ जाएगी जैसे क्षेत्र की अन्य कई बोलियां प्रचलन से बाहर होकर या तो विलुप्त हो गई या किसी अन्य समर्थ बोली या भाषा में विलीन होकर अपना अस्तित्व खत्म कर बैठी । गौरतलब तथ्य है कि जब एक बोली मरती है तब बोली के साथ-साथ तीज-त्यौहार, रिश्ते-नाते, रहन-सहन संस्कृति बोली के साथ साथ खत्म होते जाते हैं ।

छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य परिषद, संपदा समाजसेवी संस्थान, जनजातीय कल्याण एवं शोध संस्थान सहित कई सामाजिक तथा साहित्यिक संगठनों ने डॉक्टर त्रिपाठी को उनके शोध तथा आंचल की लोकप्रिय भाषा को बचाने के लिए उनके प्रयासों के लिए उन्हें बधाई तथा शुभकामनाएं दी हैं।

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