रायपुर। छत्तीसगढ़ में संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों का पंजीयन कराना अब पहले के मुकाबले काफी सस्ता हो गया है। राज्य सरकार द्वारा वसीयत, पारिवारिक बंटवारा, हक त्याग और गिफ्ट डीड जैसे पात्र दस्तावेजों का पंजीयन शुल्क घटाकर महज 500 रुपए किए जाने के बाद रजिस्ट्री कराने वालों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। कम शुल्क का फायदा उठाते हुए बड़ी संख्या में लोग अपनी पारिवारिक संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों का पंजीयन करा रहे हैं। प्रदेश में इस तरह के पंजीयन के मामले में राजधानी रायपुर सबसे आगे है।
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73 हजार की जगह सिर्फ 500 रुपए में हुई रजिस्ट्री
रायपुर के जवाहर नगर निवासी उमंग सोनी को इस फैसले से बड़ी आर्थिक राहत मिली है। उनके पिता ने उन्हें एक मकान दान में दिया था, लेकिन पहले गिफ्ट डीड की रजिस्ट्री कराने के लिए करीब 73 हजार 632 रुपए का शुल्क देना पड़ता था। अधिक खर्च होने के कारण उन्होंने उस समय पंजीयन नहीं कराया था।
अब नई व्यवस्था के तहत महज 500 रुपए में दस्तावेज का पंजीयन होने से उन्हें सीधे 73 हजार 132 रुपए की बचत हुई। यह उदाहरण बताता है कि पंजीयन शुल्क में कमी से आम लोगों को कितनी बड़ी आर्थिक राहत मिल रही है।
छत्तीसगढ़ में 37 हजार से ज्यादा दस्तावेजों का पंजीयन
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 से 12 अक्टूबर 2026 के बीच छत्तीसगढ़ में वसीयत, पारिवारिक बंटवारा, हक त्याग और गिफ्ट डीड से संबंधित कुल 37 हजार 842 दस्तावेजों का पंजीयन किया गया।
पहले पूरे साल में इस तरह के दस्तावेजों का पंजीयन 10 हजार तक भी नहीं पहुंचता था। लेकिन शुल्क में कटौती के बाद पंजीयन कराने वालों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रायपुर में सबसे ज्यादा 5,324 रजिस्ट्रियां
प्रदेश में इन दस्तावेजों के पंजीयन के मामले में रायपुर पहले स्थान पर है। वहीं राजनांदगांव और बलौदाबाजार में भी बड़ी संख्या में लोगों ने इस सुविधा का लाभ उठाया है।
| जिला | पंजीयन की संख्या |
|---|---|
| रायपुर | 5,324 |
| राजनांदगांव | 4,079 |
| बलौदाबाजार | 2,774 |
| पूरे छत्तीसगढ़ में | 37,842 |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कम पंजीयन शुल्क के कारण संपत्ति से जुड़े पारिवारिक दस्तावेजों को विधिवत पंजीकृत कराने में लोगों की रुचि बढ़ी है। पहले संपत्ति से जुड़े इन दस्तावेजों के पंजीयन पर बाजार मूल्य के आधार पर शुल्क निर्धारित किया जाता था। उदाहरण के लिए, एक करोड़ रुपए की संपत्ति के दस्तावेज के पंजीयन पर करीब 80 हजार रुपए तक शुल्क देना पड़ सकता था।
अब पात्र दस्तावेजों के लिए पंजीयन शुल्क 500 रुपए निर्धारित होने से लोगों को हजारों रुपए की बचत हो रही है। खासकर पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे, गिफ्ट डीड और हक त्याग से जुड़े मामलों में यह व्यवस्था आर्थिक रूप से राहत देने वाली साबित हो रही है। पंजीयन शुल्क में कमी के बाद अब लोग आपसी सहमति से संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों का कानूनी पंजीयन कराने के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंच रहे हैं। पहले अधिक शुल्क के कारण कई परिवार दस्तावेजों का पंजीयन कराने से बचते थे।
नई व्यवस्था से न केवल लोगों का खर्च कम हुआ है, बल्कि संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों को औपचारिक रूप से दर्ज कराने की प्रक्रिया को भी बढ़ावा मिला है। हालांकि, 500 रुपए की शुल्क सुविधा संबंधित दस्तावेज की पात्रता और लागू नियमों के अनुसार ही मिलेगी।
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