बंगाल की खाड़ी में बना बवंडर पहुंच सकता है बस्तर, 29 अक्टूबर तक झमाझम बारिश के आसार

बंगाल की खाड़ी में बना बवंडर पहुंच सकता है बस्तर, 29 अक्टूबर तक झमाझम बारिश के आसार

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से इस वक्त की बड़ी खबर आ रही है. क्षेत्र में अब आफत वाली बारिश दस्तक देने वाली है. समंदर में उठा बवंडर बस्तर के खेत-खलिहानों तक पहुंच सकता है. जी हां, बंगाल की खाड़ी में लो-प्रेशर से बना सिस्टम अब चक्रवात में बदल चुका है, जिसका असर बस्तर संभाग पर देखने को मिल सकता है.

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विभाग का कहना है कि 25 अक्टूबर से आसमान में बादल घिरेंगे और 29 अक्टूबर तक रुक-रुक कर तेज बारिश होगी. हवा की रफ्तार भी सामान्य से ज्यादा रहेगी, जिससे कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों को खतरा है.इसी खतरे को देखते हुए बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा ने शनिवार देर शाम आपात बैठक ली. उन्होंने साफ निर्देश दिए हैं कि कोई भी अधिकारी मुख्यालय नहीं छोड़ेगा.जिला मुख्यालय से लेकर तहसील तक कंट्रोल रूम 24 घंटे चालू रहेंगे. राजस्व अमले को निचली बस्तियों में मुनादी कराने, पुलिस को बैरिकेडिंग और स्वास्थ्य विभाग को दवाइयों का स्टॉक रखने को कहा गया है. नगर निगम की टीम नालों की सफाई में जुट गई है ताकि पानी सड़कों पर न भरे.

इस बेमौसम बारिश से सबसे ज्यादा चिंता में किसान हैं. खेतों में धान की फसल पककर तैयार खड़ी है, कहीं-कहीं कटाई भी शुरू हो गई थी. दंतेवाड़ा कृषि विज्ञान केंद्र ने तुरंत किसानों के नाम संदेश जारी किया है.वैज्ञानिकों ने कहा है – धान, अरहर, उड़द और तिल की कटाई 2-3 दिन बिल्कुल न करें.कटी हुई फसल को खेत में न छोड़ें, पॉलिथीन से ढककर ऊंचे टीले पर रखें.खेत के मेड़ पर नाली बना दें ताकि पानी भरा न रहे. अभी तिवड़ा और अलसी बोने का विचार छोड़ दें, नवंबर के पहले हफ्ते में बोनी करें.साथ ही सब्जी उत्पादकों से कहा गया है कि बेल वाली सब्जियों को रस्सी से बांध दें और केले के पेड़ के पास बांस गाड़ दें. पशुपालकों को सलाह दी गई है कि मवेशियों को खुले में न बांधें, शेड में सूखा चारा रखें और बिजली चमकने पर पेड़ों से दूर रहें.

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