बंगाल की खाड़ी में बना लो प्रेशर एरिया रविवार को चक्रवाती तूफान में बदल गया है। चक्रवात ‘अर्णव’ धीरे-धीरे भयावह रूप ले रहा है। 28 अक्टूबर की सुबह यह आंध्र प्रदेश के तट के करीब पहुंचेगा। अनुमान है कि 28 अक्टूबर को दिन में करीब 11:30 बजे आंध्र प्रदेश के काकीनाडा के दक्षिण में तट से टकरा सकता है। इस चक्रवाती तूफान का असर कई राज्यों में देखने का मिल सकता है। ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने भारी बारिश को लेकर अलर्ट भी जारी कर दिया है।
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मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, 28 और 29 अक्टूबर राज्य के कई इलाकों में बारिश होगी। मौसम विभाग ने बस्तर दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में बारिश की संभावना जताई है। साथ ही किसानों के लिए भी अलर्ट जारी की है।भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त पूर्वानुमान के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रही चक्रवाती स्थिति के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में 25 अक्टूबर से वर्षा की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। प्रदेश में 28 और 29 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है। इसे देखते हुए किसानों को फसलों की सुरक्षा, खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी और पशुओं को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।
25 अक्टूबर को बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना है। बालोद, धमतरी, रायपुर, गरियाबंद, महासमुंद, दुर्ग, राजनांदगांव सहित कई जिलों में भी भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है। 26 अक्टूबर को दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, कांकेर, कोंडागांव, बिलासपुर, बेमेतरा, बस्तर सहित विभिन्न जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना है। 27 अक्टूबर को दक्षिण छत्तीसगढ़ के अनेक स्थानों पर वर्षा हो सकती है। वहीं, 28 और 29 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों में वर्षा होने तथा कुछ स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।
मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए किसानों को सलाह दी गई है कि पकने की अवस्था में पहुंच चुकी धान, दलहन एवं तिलहन फसलों की कटाई फिलहाल दो से चार दिन तक टालें। जिन किसानों ने कटाई कर ली है, वे फसल को जल्द से जल्द सुरक्षित एवं ढके हुए स्थान पर रखें। खेतों में जलभराव से बचने के लिए अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करें। खेतों की नियमित निगरानी करें और कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद ही उचित कीटनाशक या कवकनाशक का छिड़काव करें। उतेरा फसल के रूप में तिवरा और अलसी की बुवाई कुछ दिनों के लिए टालने तथा रबी फसलों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी गई है।
तेज हवा और वर्षा की आशंका को देखते हुए लौकी, करेला जैसी लता वाली सब्जियों को सहारा दें। जिन केले के पौधों में फूल या फल आ चुके हैं, उन्हें बांस से सहारा देकर गिरने से बचाएं। खेतों और बगीचों में जल निकासी सुनिश्चित करें। ओलावृष्टि की आशंका वाले क्षेत्रों में उपलब्धता के अनुसार ओलावृष्टिरोधी जाली का उपयोग करें। पशुओं को सूखे एवं सुरक्षित स्थान पर रखें, उनके लिए चारे और स्वच्छ पानी की व्यवस्था करें तथा वज्रपात के दौरान पेड़ों के नीचे आश्रय लेने से बचें।
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