देशभर के कारोबारियों, छोटे व्यापारियों और करदाताओं को राहत देने के उद्देश्य से 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में कई अहम बदलावों की सिफारिश की गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 8 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में जीएसटी से जुड़े नियमों को सरल बनाने, पेनल्टी कम करने, रिफंड प्रक्रिया तेज करने और टैक्स संबंधी विवादों को कम करने पर जोर दिया गया। केंद्र सरकार की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन सिफारिशों का उद्देश्य कारोबारियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया आसान बनाना है।
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जीएसटी परिषद ने केंद्रीय जीएसटी कानून के तहत गिरफ्तारी से जुड़े प्रावधानों को हटाने की सिफारिश की है। इसके साथ ही अभियोजन की मौद्रिक सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। परिषद ने कुछ अपराधों की परिभाषा और सजा के प्रावधानों को भी तर्कसंगत बनाने की सिफारिश की है। न्यूनतम छह महीने की कैद के प्रावधान को हटाने और सजा के मामले में अदालत को विवेकाधिकार देने की भी सिफारिश की गई है।
कारोबारियों को राहत देने के लिए जीएसटी कानून के तहत सामान्य पेनल्टी की अधिकतम सीमा 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, 10,000 रुपये से कम की कर राशि से जुड़े मामलों में नए कारण बताओ नोटिस जारी नहीं करने और निर्धारित प्रावधान लागू होने के बाद ऐसे लंबित मामलों को भी उसी सीमा के अनुसार निपटाने का प्रस्ताव है।
रिटर्न में देरी या कर भुगतान से जुड़ी चूक के मामलों में कर की वसूली, ब्याज और लागू पेनल्टी के नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इसलिए कारोबारियों को रिटर्न दाखिल करने और कर भुगतान की समयसीमा का पालन करना जरूरी है।
कारोबारियों की कार्यशील पूंजी की समस्या कम करने के लिए रिफंड प्रक्रिया को अधिक स्वचालित बनाने की सिफारिश की गई है। जोखिम आकलन के आधार पर पात्र शून्य-दर वाली सप्लाई और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से जुड़े रिफंड दावों की 90 प्रतिशत राशि को अंतरिम रूप से मंजूरी देने का प्रस्ताव है।
इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में उपलब्ध अतिरिक्त राशि के रिफंड को भी स्वचालित तरीके से मंजूर करने की सिफारिश की गई है। इन बदलावों से पात्र कारोबारियों का पैसा लंबे समय तक अटका रहने की समस्या कम हो सकती है।
जीएसटी परिषद ने रजिस्ट्रेशन की जानकारी में बदलाव करने की प्रक्रिया को सरल बनाने की सिफारिश की है। प्रस्ताव के अनुसार, कारोबार से जुड़ी कई जानकारियों में संशोधन पोर्टल पर स्वतः स्वीकार किए जा सकेंगे। हालांकि, मुख्य व्यवसाय स्थल से संबंधित बदलावों के लिए अलग नियम लागू हो सकते हैं।
परिषद ने रजिस्ट्रेशन रद्द करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाने का प्रस्ताव रखा है। कुछ पात्र मामलों में सभी लंबित रिटर्न दाखिल करने और बकाया भुगतान करने के बाद आवेदन को सिस्टम के माध्यम से स्वीकार किया जा सकेगा।
माल की आवाजाही के दौरान अनावश्यक रोक-टोक कम करने के लिए ई-वे बिल और परिवहन से जुड़े नियमों में बदलाव की सिफारिश की गई है। प्रस्ताव के मुताबिक, माल ले जा रहे वाहन को विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर और संयुक्त आयुक्त या उससे ऊपर के अधिकृत अधिकारी की अनुमति से रोका जा सकेगा।
जांच, माल रोकने या जब्ती की कार्रवाई के लिए संबंधित राज्य के अधिकार क्षेत्र से जुड़े नियम भी निर्धारित किए गए हैं। इन उपायों का उद्देश्य परिवहन में अनावश्यक देरी कम करना और कारोबार को सुगम बनाना है।
इन सिफारिशों का उद्देश्य जीएसटी अनुपालन को सरल बनाना, छोटी तकनीकी गलतियों से जुड़े विवाद कम करना और कारोबारियों को समय पर रिफंड उपलब्ध कराना है। हालांकि, इन बदलावों के लागू होने की तारीख और अंतिम कानूनी प्रभाव संबंधित संशोधनों तथा अधिसूचनाओं पर निर्भर करेंगे। कारोबारियों को किसी भी बदलाव के आधार पर अपनी कर संबंधी प्रक्रिया बदलने से पहले आधिकारिक अधिसूचना और जीएसटी पोर्टल की जानकारी देखनी चाहिए।
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