नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान को देश की शीर्ष अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताते हुए दायर की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने विचार करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने आजम खान को सीधे राहत देने के बजाय उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: 48 घंटे में रिकॉर्ड ट्रांसफर करे रजिस्ट्री
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री दो दिनों के भीतर केस से संबंधित सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड इलाहाबाद हाईकोर्ट को हस्तांतरित करे। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से आग्रह किया है कि वे 16 नवंबर को एक विशेष खंडपीठ गठित कर इस मामले की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई सुनिश्चित करें। अदालत में आजम खान का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने गिरफ्तारी के समय और मंशा पर कड़े सवाल उठाए। सिब्बल ने दलील दी कि आजम खान के खिलाफ 28 मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिनमें यह मनी लॉन्ड्रिंग का केस भी शामिल है। उन्होंने इसे राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित उत्पीड़न करार दिया।
सिब्बल ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि घटना साल 2006 की बताई जा रही है, जबकि इसकी प्राथमिकी (FIR) 13 साल बाद यानी 2019 में दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि आजम खान अब सत्ता में भी नहीं हैं, ऐसे में इतने वर्षों बाद मामला बनाना कानून का दुरुपयोग है। सिब्बल ने मानवीय आधार पर रिहाई की मांग करते हुए कहा कि आजम खान की उम्र करीब 80 वर्ष हो चुकी है और उनकी शारीरिक स्थिति ठीक नहीं है; यदि उन्हें राहत नहीं मिली तो वे जेल में ही दम तोड़ देंगे। कोर्ट की सख्त टिप्पणी: प्रभाव के कारण हो सकती है एफआईआर में देरी सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने बचाव पक्ष की उम्र और देरी से जुड़ी दलीलों पर असहमति जताई। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आजम खान पर यूनिवर्सिटी निर्माण के लिए किसानों से बलपूर्वक और प्रभाव का इस्तेमाल कर जमीन हड़पने के गंभीर आरोप हैं।
कोर्ट ने सिब्बल की 2006 बनाम 2019 वाली दलील पर कहा कि यह भी देखा जाएगा कि प्राथमिकी दर्ज होने में हुई देरी के पीछे आजम खान का राजनीतिक रसूख और प्रभाव तो नहीं था। हालांकि, इसके जवाब में सिब्बल ने दावा किया कि कथित घटना के समय आजम खान सत्ता में नहीं थे। डासना जेल में बंद हैं सपा नेता जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े धन शोधन के इस मामले में ईडी ने आजम खान को उस वक्त हिरासत में ले लिया था, जब वे हाल ही में रामपुर जेल से रिहा हुए थे। इसके बाद गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजते हुए डासना जेल भेज दिया। जेल से अंतरिम राहत पाने के लिए वे सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन अब उनकी रिहाई का भविष्य 16 नवंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर ही निर्भर करेगा।
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