कांकेर :- छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा ब्लॉक के कंदाड़ी गांव से स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की तस्वीर सामने आई है। तीन माह की गर्भवती सुलाता जाड़े की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन कोटरी नदी पार करते समय लकड़ी की नाव में ही उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि गांव तक पहुंचने के लिए आज भी ग्रामीणों को लकड़ी की नाव का सहारा लेना पड़ता है और बारिश के दिनों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना और भी मुश्किल हो जाता है।
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परिजनों के मुताबिक, महिला की तबीयत 16 अगस्त से खराब थी। 17 अगस्त को हालत बिगड़ने पर 102 महतारी एक्सप्रेस से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद परिजन महिला को खाट पर लेकर नदी तक पहुंचे और लकड़ी की नाव से दूसरे किनारे ले जाने लगे। इसी दौरान नदी की मझधार में महिला ने दम तोड़ दिया। मृतका के पति रमेश जाड़े के अनुसार, महिला का पहले इलाज कराया गया था और अब परिवार पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहता।
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और मामले की जांच शुरू की। स्वास्थ्य विभाग के आरएमए जितेंद्र देवांगन के मुताबिक, महिला का 10 अगस्त को छोटेबेठिया में मलेरिया टेस्ट कराया गया था, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। महिला की मौत की वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। वहीं, इस घटना ने कंदाड़ी जैसे दुर्गम गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं, आपातकालीन परिवहन और नदी पर पुल की जरूरत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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