नई दिल्ली/कोलकाता :- ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम और आधिकारिक चुनाव चिन्ह ‘जोड़ा फूल’ (फूल और घास) पर कब्जे को लेकर छिड़े राजनीतिक विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। जिसके अनुसार, शीर्ष अदालत ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि वह चार महीने के भीतर यह तय करे कि असली तृणमूल कांग्रेस कौन सी है और पार्टी के नाम व प्रतीक पर किसका अधिकार होगा।
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों—ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और बागी गुट—को अपना-अपना पक्ष व जवाब दाखिल करने के लिए 4 सप्ताह की समयसीमा दी है। इसके बाद चुनाव आयोग को अगले 3 महीनों में दोनों पक्षों के दावों की सुनवाई पूरी कर अंतिम फैसला सुनाना होगा। इस तरह मामले के पूर्ण निस्तारण के लिए कुल 4 महीने की मियाद तय की गई है।
पार्टी में हुए आंतरिक विभाजन के बाद चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी कर ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिन्ह ‘जोड़ा फूल’ के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। आगामी उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने दोनों धड़ों को अस्थाई नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए थे:
*ममता बनर्जी गुट:* ‘फुटबॉलर’ (Footballer) चुनाव चिन्ह के साथ चुनावी मैदान में है।
* **बागी गुट (अरुप रॉय/ऋतब्रत बनर्जी पक्ष):** ‘लिफाफा’ (Envelope) चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल कर रहा है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस अंतरिम फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। उनकी याचिका में कहा गया कि उपचुनावों की घोषणा के बाद पार्टी के चुनाव चिन्ह को फ्रीज करना और यथास्थिति बदलना लोकतांत्रिक सिद्धांतों और कानून के खिलाफ है।
सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद अब चुनाव आयोग ‘इलेक्शन सिम्बल्स (रिजर्वेशन एंड अलॉटमेंट) ऑर्डर, 1968’ के प्रावधानों के तहत दोनों गुटों के संगठनात्मक व विधायी समर्थन के प्रमाणों की समीक्षा करेगा। आयोग को यह तय करना होगा कि किस गुट के पास वास्तविक बहुमत है और किसे असली पार्टी के रूप में मान्यता दी जाएगी।
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