राजधानी :- SIR को लेकर उपजे विवादों और मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगे आरोपों के बाद भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए SIR प्रक्रिया के तहत आम नागरिकों को मिलने वाले नोटिस के नियमों में आमूलचूल बदलाव कर दिया है। आयोग के नए आदेश के अनुसार, अब किसी भी मतदाता को नोटिस के नाम पर प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
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ECI द्वारा लिए गए सबसे अहम फैसले के तहत उन मतदाताओं को बड़ी राहत दी गई है, जिन्हें अनमैप्ड या लॉजिकल विसंगतियों के चलते SIR नोटिस भेजे गए थे। नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक:
घर पहुंच सेवा: बूथ लेवल अधिकारी यानि BLO संबंधित मतदाता के आवास पर जाएंगे, आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें सीधे ECINet पोर्टल पर डिजिटल रूप से अपलोड करेंगे।
नागरिकों को ERO या AERO के कार्यालय में सशरीर पेश होने के लिए कतई नहीं बुलाया जाएगा।
ऑनलाइन सुनवाई का विकल्प
केवल अत्यंत असाधारण और अपरिहार्य परिस्थितियों में ही ERO स्तर पर सुनवाई की अनुमति होगी, जो पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से ही आयोजित की जाएगी। इस ऑनलाइन सुनवाई में मतदाता की अनुपस्थिति पर उसके परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य पक्ष रख सकेगा। विभिन्न राज्यों में मतदाताओं की सहूलियत को देखते हुए आयोग ने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीखों में विस्तार की घोषणा की है:
दिल्ली राज्य: मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के अनुरोध पर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ाकर 30 अक्टूबर 2026 और उनके अंतिम निपटारे की तिथि 30 नवंबर 2026 कर दी गई है।
महाराष्ट्र राज्य: आपत्तियां दर्ज कराने की आखिरी तारीख 12 अक्टूबर 2026 और उनके निस्तारण की अंतिम तिथि 10 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।
IIT/IIIT के स्वतंत्र विशेषज्ञ करेंगे ECINet की तकनीकी समीक्षा
फील्ड स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों की सुगमता और तकनीकी पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी, जिसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और IIIT के स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह समिति इस बात की समीक्षा करेगी कि ECINet पोर्टल मौजूदा कानूनों और निर्वाचन नियमों के अनुकूल काम कर रहा है या नहीं। इसके अलावा यह भी तय किया गया कि भविष्य में सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ा कोई भी नया प्रोजेक्ट अधिकारियों की समिति में व्यापक विमर्श के बाद ही आयोग की अंतिम मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
चुनाव आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वंचित तबके के मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया से बाहर न होने दिया जाए। इसके तहत रैन बसेरों (नाइट शेल्टर) में रहने वाले लोगों, निर्माण मजदूरों और बेघर आबादी के लिए विशेष हेल्प डेस्क और कैंप लगाए जाएंगे। साथ ही यह दोहराया गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा SIR के लिए Form 6 के साथ संलग्न घोषणा पत्र को विधिसम्मत माना गया है, जबकि गैर-एसआईआर अवधि में 1960 के पुराने नियमों वाले फॉर्म ही मान्य रहेंगे।
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