रायपुर। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता और एकता में निहित है। अनेक भाषाओं, धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद देशवासियों को एक सूत्र में बांधने वाली राष्ट्रीय एकता ही भारत की पहचान है। हर वर्ष 31 अक्टूबर को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। यह अवसर उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करने के साथ देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत बनाने के संकल्प को दोहराने का संदेश देता है।
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वर्ष 1947 में स्वतंत्रता के समय भारत के सामने देशी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करने की बड़ी चुनौती थी। देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने वी. पी. मेनन और अन्य अधिकारियों के सहयोग से संवाद, कूटनीति और दृढ़ नेतृत्व के माध्यम से रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों ने स्वतंत्र भारत को एकजुट करने और उसकी राजनीतिक अखंडता मजबूत करने में ऐतिहासिक योगदान दिया।वर्ष 2014 से सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में विशेष रूप से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर रन फॉर यूनिटी, राष्ट्रीय एकता की शपथ और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उनकी विरासत बताती है कि अलग-अलग विचारों और पहचानों का सम्मान करते हुए साझा राष्ट्रीय लक्ष्य के लिए काम करना एक मजबूत राष्ट्र की बुनियाद है।
आज राष्ट्रीय एकता के सामने चुनौती देश के प्रत्येक क्षेत्र और नागरिक तक विकास के लाभ पहुंचाने की है। सड़क, रेल, बिजली, संचार और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार दूरस्थ इलाकों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार के अवसर बढ़ सकते हैं। लेकिन विकास तभी व्यापक विश्वास पैदा करता है, जब सुविधाओं तक पहुंच आसान हो और सभी वर्गों को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी योजनाओं का उद्देश्य लोगों के जीवन में सुधार लाना है। जब जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचता है, तो शासन और संस्थाओं के प्रति भरोसा मजबूत होता है। यही भरोसा सामाजिक एकता और समावेशी विकास को आगे बढ़ाता है।
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार, उद्योग और आंतरिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग से विकास कार्यों को गति मिल सकती है। लोकतंत्र में विचारों और क्षेत्रीय आकांक्षाओं में अंतर स्वाभाविक है, लेकिन इनका समाधान संवाद, संवैधानिक मूल्यों और आपसी सम्मान के माध्यम से किया जाना चाहिए।विकास योजनाओं में स्थानीय जरूरतों का ध्यान रखना भी जरूरी है। विशेषकर दूरस्थ और अपेक्षाकृत पिछड़े क्षेत्रों के नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के बेहतर अवसर मिलने चाहिए, ताकि वे स्वयं को देश की विकास यात्रा का सक्रिय हिस्सा महसूस कर सकें।विविधता का सम्मान ही भारत की असली ताकतराष्ट्रीय एकता का अर्थ यह नहीं है कि सभी लोग एक ही भाषा बोलें, समान परंपराएं अपनाएं या एक जैसे विचार रखें। भारत की वास्तविक शक्ति इस बात में है कि अलग-अलग सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान वाले लोग परस्पर सम्मान के साथ साथ रह सकें।
डिजिटल संचार के दौर में सूचनाएं तेजी से फैलती हैं। ऐसे में अफवाहों से बचना, किसी जानकारी की सत्यता जांचना और जिम्मेदारी से अपनी बात रखना जरूरी है। सामाजिक तनाव और अविश्वास बढ़ाने वाली गतिविधियों के बजाय संवाद, सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय एकता सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रह सकती; इसे दैनिक व्यवहार में समानता, संवेदनशीलता और सम्मान के जरिए मजबूत करना होता है।‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ से बढ़ेगी आपसी समझ वर्ष 2015 में शुरू की गई ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पहल का उद्देश्य विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा पारस्परिक समझ को बढ़ावा देना है। सांस्कृतिक कार्यक्रम, शैक्षणिक गतिविधियां, अंतरराज्यीय यात्राएं और अलग-अलग क्षेत्रों की कला एवं परंपराओं से परिचित कराने वाले आयोजन विशेषकर युवाओं में राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत कर सकते हैं।
युवा देश के भविष्य की महत्वपूर्ण शक्ति हैं। शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा, स्वच्छता और जनजागरूकता के कार्यों में उनकी भागीदारी समाज को जोड़ने में मदद कर सकती है। जब युवा भाषाई और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर साझा हितों को महत्व देते हैं, तब समावेशी और मजबूत भारत के निर्माण का रास्ता प्रशस्त होता है। राष्ट्रीय एकता हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी राष्ट्रीय एकता दिवस हमें याद दिलाता है कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखना केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। देश की सुरक्षा के साथ सामाजिक सद्भाव, समान अवसर, सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच और लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास भी स्थायी शांति और प्रगति के लिए जरूरी हैं।
सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत के राजनीतिक एकीकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह समावेशी विकास, सामाजिक न्याय, आपसी सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के माध्यम से इस विरासत को आगे बढ़ाए। राष्ट्रीय एकता का वास्तविक अर्थ सभी नागरिकों का एक जैसा सोचना नहीं, बल्कि अलग-अलग विचारों और संस्कृतियों के बावजूद साझा भविष्य के निर्माण के लिए साथ खड़ा होना है। यही सरदार पटेल के सपनों के मजबूत भारत की दिशा है
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