रायपुर। चक्रवात और बाढ़ की संभावित परिस्थितियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग ने आपात स्थिति से निपटने की तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन से लेकर संक्रामक बीमारियों की निगरानी और महामारी नियंत्रण तक के लिए स्वास्थ्य संचालनालय ने 9 बिंदुओं की गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत प्रदेश के सभी जिलों में 24 घंटे हेल्थ कंट्रोल रूम स्थापित करने, रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैयार रखने और जरूरी दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा गया है।
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स्वास्थ्य संचालनालय के आपदा प्रबंधन कार्यक्रम ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। यह निर्देश प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) और सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षकों को भेजा गया है। विभाग ने जिला स्तर पर स्वास्थ्य आपदा प्रबंधन एवं महामारी नियंत्रण समिति को सक्रिय करने के साथ जिला सर्विलांस अधिकारी (DSO), IDSP और संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाने पर जोर दिया है। निर्देश के मुताबिक, जिला और विकासखंड स्तर पर 24×7 हेल्थ कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। बाढ़ की आशंका वाले और संवेदनशील गांवों की पहचान कर उनकी सूची तैयार करनी होगी। इसके लिए जिला प्रशासन, नगर निगम, पंचायत और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के साथ समन्वय बनाकर काम करने को कहा गया है।
आपदा के दौरान संक्रामक बीमारियों का फैलाव रोकने के लिए सभी स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित रोग निगरानी की जाएगी। अतिसार, बुखार, पीलिया, उल्टी और अन्य बीमारियों के मामलों में असामान्य बढ़ोतरी की रोजाना समीक्षा करनी होगी।स्वास्थ्य संस्थानों को IDSP-IHIP पोर्टल पर S, P और L फॉर्म की नियमित रिपोर्टिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी संभावित बीमारी के प्रकोप की जानकारी मिलते ही जिला सर्विलांस इकाई को सूचना देनी होगी। जरूरत पड़ने पर मरीजों के सैंपल लेकर लैब जांच भी कराई जाएगी। जिले और विकासखंड स्तर पर रैपिड रिस्पॉन्स टीम (RRT) की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। किसी क्षेत्र में महामारी फैलने की आशंका या सूचना मिलने पर टीम को तत्काल भेजकर जांच और नियंत्रण की कार्रवाई शुरू करनी होगी। टीम मरीजों की पहचान, उनके संपर्क में आए लोगों की जानकारी, संक्रमण के स्रोत की जांच और जरूरी उपचार व रेफरल की व्यवस्था करेगी।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों में जरूरी दवाइयों और मेडिकल सामग्री का पर्याप्त भंडारण रखने को कहा है। इसमें ORS, जिंक, IV फ्लूड, आवश्यक दवाइयां, एंटी स्नेक वेनम, क्लोरीन टैबलेट, ब्लीचिंग पाउडर, PPE किट, मास्क, दस्ताने और जांच सामग्री शामिल हैं। दवाइयों को एयरटाइट कंटेनर में सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। बाढ़ के दौरान पेयजल दूषित होने और जलभराव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका को देखते हुए जल स्रोतों की नियमित जांच और क्लोरीनेशन कराने को कहा गया है। दूषित पानी के स्रोतों की पहचान कर नियंत्रण के उपाय करने होंगे। राहत शिविरों में सुरक्षित पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।
इसके साथ ही जलभराव वाले इलाकों में मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं। बुखार के मरीजों की मलेरिया सहित जरूरी जांच कराई जाएगी। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया से बचाव के लिए जागरूकता गतिविधियां भी चलाई जाएंगी। प्रभावित लोगों को इलाज उपलब्ध कराने के लिए राहत शिविरों में नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने होंगे। गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को प्राथमिकता देने के निर्देश हैं। जरूरत के मुताबिक मोबाइल मेडिकल टीम और एंबुलेंस की व्यवस्था करनी होगी, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में सुरक्षित पेयजल, हाथ धोने, व्यक्तिगत स्वच्छता और भोजन की साफ-सफाई को लेकर जागरूकता अभियान चलाने को कहा है। लोगों को अतिसार, पीलिया, बुखार और दूसरी संक्रामक बीमारियों के लक्षणों की जानकारी दी जाएगी। बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
तैयारियों और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी के लिए सभी CMHO को जिला स्तर पर दैनिक रिपोर्ट तैयार कर निर्धारित समय-सीमा में राज्य कार्यालय और DM Cell को भेजनी होगी। इसमें प्रभावित गांवों और आबादी का विवरण, राहत शिविरों व स्वास्थ्य शिविरों की संख्या, मरीजों और संक्रामक रोगों के मामलों की जानकारी देनी होगी। इसके अलावा दवाइयों की उपलब्धता, पेयजल क्लोरीनेशन की स्थिति, तैनात स्वास्थ्य कर्मियों, मरीजों के रेफरल और मृत्यु से जुड़ी जानकारी भी रिपोर्ट में शामिल करनी होगी।
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